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अछूत गांव के बाहर क्यों रहते हैं?

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युद्धरीति के विचार से भी यह आवश्यक था कि ये बाहर से आए हुए लोग गांव की सीमा पर रहें ताकि वे आक्रमणकारियों का मुकाबला कर सकें। इन दोनों बातों ने मिलकर यही निर्णय कराया कि वे लोग गांव के बाहर गांव की सीमा पर रहें।

अब हम अपने मुख्य प्रश्न पर आते हैं। अछूत गांव के बाहर क्यों रहते हैं? ऊपर जो स्थिति बताई गई है, उसके हिसाब से उस प्रश्न का उत्तर पाने का कुछ प्रयत्न किया जा सकता है। यही बात जो अन्यत्र हुई वह भारत में भी हुई होगी, जबकि घुमन्तु जीवन को छोड़ हिंदू समाज स्थिर जीवन की ओर अग्रसर था। आदिम समाज में दोनों तरह के लोग रहे ही होंगेµस्थिर रूप से बसे हुए और छितरे हुए परास्त लोग। जो स्थिर रूप से बसे, उन्होंने गांव की बुनियाद डाली और गांव में बसे। छितरे हुए परास्त लोग वे थे जो भिन्न कबीले के थे। इसलिए भिन्न रक्त होने के कारण गांव के बाहर बसे।

यह सिद्धांत इतना नया है कि आलोचकों को अपने और प्रश्नों का उत्तर मिले बिना संतोष हो ही नहीं सकता। वे पूछ सकते हैंःµ

(1) क्या इसका कोई ठोस प्रमाण है कि अछूत छितरे हुए व्यक्ति ही हैं?

(2) क्या इस बात का कोई प्रमाण है कि स्थिर रूप से बसने के जिस क्रम की ऊपर चर्चा की गई है, वैसा किसी अन्य देश में भी हुआ है?

(3) क्या छितरे हुए लोगों का गांव के बाहर रहना सभी संगठनों का सर्वव्यापी पहलू है।