3. अछूत गांव के बाहर क्यों रहते हैं? - Page 55

40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

नहीं हो सकता था। इसलिए उसे कबीले में व्यक्तिगत हैसियत में ही रहना पड़ता था। वह दूसरे कबीले में समाज में जहां एक कबीले का दूसरे कबीले से संग्राम हो रहा हो, इस बात का सदैव डर बना रहता था कि इधर-उधर फैले लोगों के इन समूहों पर भी आक्रमण न हो जाए। वे नहीं जानते थे कि कहां शरण ढूढें। वे नहीं जानते थे कि उन पर कौन आक्रमण कर दे और कौन उनकी रक्षा करेगा। इसलिए आश्रय स्थान मिलना और सुरक्षित रह पाना इन छितरे हुए लोगों की समस्या बन गई।

आदिम समाज के विकास के बारे में ऊपर जो कुछ संक्षिप्त रूप में कहा गया है उससे यह स्पष्ट होता है कि आदिम समाज के जीवन में एक समय था जब वह दो समूहों में विभक्त हो गया था। एक समूह एक जगह बसे हुए आदमियों का था। उनकी समस्या थी कि उन्हें ऐसे लोग मिलें जो घुमन्तु आक्रमणकारियों के विरुद्ध उनकी पहरेदारी का काम करें। दूसरा समूह उन छितरे हुए परास्त लोगों का था जिनके सामने यह समस्या थी कि उन्हें कोई ऐसे संरक्षण मिल जाएं जो भोजन तथा शरण स्थान दे सकें।

अगला प्रश्न यह है कि इन दोनों समूहों ने अपनी समस्या को कैसे सुलझाया यद्यपि हमारे पास प्राचीन काल का कोई ऐसा दस्तावेज नहीं है जिसके आधार पर हम निश्चयात्मक रूप से यह कह सकें कि दोनों में किसी प्रकार का करार अथवा समझौता हुआ हो तो भी हम कह सकते हैं कि दोनों ने आपस में समझौता किया, जिसके अनुसार इन छितरे हुए परास्त लोगों ने एक जगह स्थिर रूप से बसी हुई जातियों की चौकीदारी अथवा पहरेदारी करनी स्वीकार कर लिया। एक जगह स्थिर रूप से बड़ी जातियों ने उन्हें भोजन तथा शरण स्थान देना स्वीकार किया। वास्तव में यह बड़ा अस्वाभाविक होता यदि इस प्रकार की आपसी व्यवस्था न कर ली गई होती, क्योंकि दोनों को अपने-अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए एक दूसरे की मदद चाहिए थी।

इस सौदे में एक कठिनाई अवश्य उत्पन्न हुई होगी-शरण स्थान की कठिनाई। छितरे हुए आदमी कहां रहें। स्थिर रूप से बसे हुए लोगों के बीच में अथवा उनसे दूरी पर? इस समस्या को हल करने में दो बातें निर्णायक सिद्ध हुई होंगी-एक तो रक्त संबंध की, दूसरी युद्ध नीति की। आदिम लोगों की मान्यताओं के अनुसार रक्त संबंधी ही एक साथ रह सकते थे। कोई भी बाहरी आदमी उस क्षेत्र में प्रवेश नहीं पा सकता था जहां किसी कबीले विशेष का अधिकार हो। ये छितरे हुए आदमी फ्बाहरीय् थे। वे उस कबीले के थे जो स्थिर रूप से बसे हुए लोगों से भिन्न था। यदि ऐसा था तो उन्हें स्थिर रूप से बसे हुए आदमियों के बीच में नहीं रहने दिया जा सकता था।