अध्याय 4
क्या अछूत छितरे व्यक्ति हैं?
यदि यह प्रश्न पूछा जाए कि क्या अछूत मूल में छितरे व्यक्ति ही हैं तो मेरा उत्तर है फ्हांय्। हां, कहने पर अपने कथन को प्रमाणित करना पड़ता है। यदि किसी ने हिंदू गांव के छूत और अछूत लोगों के परंपरागत टोटम अथवा जाति चिन्ह का अध्ययन किया होता तो इस संबंध के यथार्थ प्रमाण मिल सकते थे। दुर्भाग्य से हिंदुओं और अछूतों के जातीय चिन्हों के संस्थान के अध्ययन को नृवंश शास्त्र के विद्यार्थियों ने आरंभ ही नहीं किया है। जब इस प्रकार की सामग्री इकट्ठी हो जाएगी तो हम इस परिच्छेद में उठाए गए प्रश्न पर निर्णयात्मक सम्मति दे सकेंगे। फिलहाल मैंने जो थोड़ी बहुत खोज की है उससे मैं संतुष्ट हूं कि ग्राम विशेष के अछूतों के गणदेव उसी गांव के हिंदुओं के गण देवों से भिन्न हैं।
इस बात के पक्ष में कि अछूत छितरे हुए व्यक्ति हैं और गांव में बसने वाली जाति जिस वर्ग की है उससे वे भिन्न दल के हैं, हिंदुओं और अछूतों के गण देवों की भिन्नता ही सर्वश्रेष्ठ प्रमाण है। लेकिन यह स्वीकार करना होगा कि इस प्रकार की सामग्री एकत्रित करने की आवश्यकता है लेकिन कुछ ऐसी बातें हैं जो स्पष्ट होने से रह गई हैं, वे कुछ दिशा का निर्देश करती हैं कि अछूत छितरे हुए व्यक्ति थे। इस तरह का प्रमाण देने वाली बातें दो प्रकार की हैं।
एक तथ्य अन्त्यज और अन्त्यवासिन नाम है जो हिंदूशास्त्रों ने कुछ जातियों को दे रखे हैं। वे बहुत प्राचीन समय से चले आ रहे हैं। कुछ वर्ग के लोगों के लिए ही इन नामों का उपयोग क्यों किया गया है? इन शब्दों में कुछ अर्थ छिपा हुआ प्रतीत होता है। ये शब्द निर्विवाद रूप से व्युत्पत्तिजन्य नाम हैं। वे अंत धातु से निकले हैं। अंत शब्द का अर्थ क्या है। हिंदू पंडितों का कहना है कि जो अंत में उत्पन्न हुआ और क्योंकि हिंदुओं की दैवी उत्पत्ति के सिद्धांत के अनुसार अछूतों की उत्पत्ति अंत में हुई, इसलिए अन्त्यज शब्द का अर्थ हुआ एक अछूत। यह तर्क बेहूदा है, और हिन्दुओं की उत्पत्ति के सिद्धांत से मेल नहीं खाता। क्योंकि इस सिद्धांत के अनुसार