4. क्या अछूत छितरे व्यक्ति हैं? - Page 59

44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

तो शूद्र अंत में पैदा हुए। अछूत तो ब्रह्मा की सृष्टि रचना से बाहर का प्राणी है। शूद्र सवर्ण हैं। इसके विपरीत अछूत अवर्ण हैं। वर्ण व्यवस्था से ब्रह्मा की सृष्टि रचना के बारे में हिंदुओं का पहले और पीछे का सिद्धांत अछूतों पर लागू नहीं होता। मेरी समझ में अन्त्यज का अर्थ सृष्टि क्रम का अंत नहीं अपितु गांव का अंत है। यह एक नाम है जो गांव की सीमा पर रहने वाले लोगों को दिया गया है। इस अन्त्यज शब्द का ऐतिहासिक महत्त्व है। यह बताता है कि समय था जब कुछ लोग गांव में रहते थे और कुछ गांव के कोने पर, गांव के अंत में रहते थे। वे अन्त्यज कहलाते थे।

कुछ ही लोग गांव की सीमा पर क्यों रहते थे? क्या इसका इसके अतिरिक्त कोई अन्य कारण हो सकता है कि वे मूल कबीलों से छितरे हुए लोग थे। और वे उस कबीले के बाहर के थे जिस वर्ग के लोग गांव के भीतर रहते थे। यही खास कारण था। यह बात इस शब्द में भी छिपी है जिसका इन लोगों के लिए प्रयोग किया गया है। इस प्रकार अन्त्य, अन्त्यज, अन्त्यवासिन शब्दों के प्रयोग का दोहरा अर्थ है। पहले तो इससे प्रकट होता है कि गांव के बाहर पृथक आवास एक ऐसी अनोखी बात थी कि जिसके लिए नये शब्दों की रचना करनी पड़ी। दूसरे इन शब्दों का जिन लोगों के लिए प्रयोग हुआ है उनकी तात्कालिक अवस्था को यथार्थ रूप से चित्रित कर देते हैं, अर्थात यह बता देते हैं कि वे पराये थे।

दूसरा तथ्य यह है कि अछूत छितरे हुए लोग हैं और महार नाम की एक जाति से संबंधित हैं। महाराष्ट्र में महार ही मुख्य अछूत जाति है। यह महाराष्ट्र की अकेली सबसे बड़ी मुख्य अछूत जाति है। महारों और दूसरे हिंदुओं का आपसी संबंध स्पष्ट करने वाली निम्नलिखित बातें ध्यान देने योग्य हैंµ (1) महार हर गांव में मिलते हैं। (2) महाराष्ट्र में हर गांव के गिर्द एक दीवार रहती है और महार उस दीवार के बाहर रहते हैं। (3) महार बारी-बारी से गांव की पहरेदारी करते हैं। (4) महार हिंदू गांववासियों के विरुद्ध अपने 52 अधिकारों का दावा करते हैं। इसमें सबसे मुख्य ये हैंः

(1) गांव के लोगों से खाना इकट्ठा करने का अधिकार।

(2) फसल के समय हर गांव से अनाज इकट्ठा करने का अधिकार।

(3) गांव में जो पशु मर जाए उसके शव अपने उपयोग में लाने का अधि कार।

महारों की स्थिति से जो बात प्रमाणित होती है निःसंदेह वह केवल महाराष्ट्र तक ही सीमित है। इस बात की अभी खोज करनी बाकी है कि क्या भारत के दूसरे प्रांतों