4. क्या अछूत छितरे व्यक्ति हैं? - Page 60

क्या अछूत छितरे व्यक्ति हैं?

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में ऐसी स्थिति है या नहीं? लेकिन यदि महारों की स्थिति को भारतव्यापी अछूतों की स्थिति का एक नमूना मान लें तो यह स्वीकार करना होगा कि भारत के इतिहास में एक ऐसा समय आया होगा जब दूसरे कबीलों के छितरे हुए लोग एक जगह स्थिर रूप से बसे हुए लोगों के पास आए और उनसे इस प्रकार का सौदा किया जिससे उन छितरे हुए आदमियों को गांव की सीमा पर बसने की अनुमति मिल गई हो। उन्हें कुछ सेवाएं देनी पड़ती थीं और बदले में उन्हें कुछ रियायतें भी मिल गईं। महारों के बारे में अनुश्रुति हैµ फ्इनके 52 अधिकार उन्हें बरार के मुस्लिम राजाओं से प्राप्त हुए हैं।य् इसका मतलब केवल इतना ही हो सकता है कि वे अधिकार तो प्राचीन ही हैं, किन्तु इन्हें बरार के राजाओं ने नये सिरे से मान्यता दी होगी।

ये तथ्य यद्यपि बहुत मामूली हैं तो भी इनसे इतना तो प्रमाणित होता है कि आरंभ से ही अछूत गांव के बाहर रहते आए हैं। ऐसा नहीं हुआ कि उन्हें अछूत बनाया गया हो और तब उन्हें गांव के बाहर जाकर रहने पर मजबूर किया गया हो। वे आरंभ से ही गांव के बाहर रहते आए हैं क्योंकि वे किसी अन्य कबीले से बिछड़े थे जो ग्रामवासियों से भिन्न था।

इस बात को स्वीकार करने में जो सबसे बड़ी कठिनाई है वह यह प्रश्न है कि अछूत सदा अछूत ही क्यों चले आए हैं? यह समस्या तब तुरंत हल हो जाएगी, जब एक बार यह बात समझ में आ जाए कि आज के अछूतों के पूर्वज अछूत नहीं थे बल्कि गांववासियों की तुलना में छितरे हुए लोग थे, उनमें और दूसरे लोगों में यदि कोई भेद था तो इतना ही कि वे पृथक कबीलों के लोग थे।