अध्याय 5
क्या ऐसे समानान्तर मामले हैं?
क्या इतिहास में कहीं और भी ऐसे मामले हैं जहां छितरे हुए लोग गांव के बाहर बसते थे। इस प्रश्न का फ्सकारात्मकय् उत्तर दिया जा सकता है। सौभाग्य से हमारे पास ऐसे उदाहरण हैं जो यह प्रमाणित करते हैं कि जो भारत में विशेष रूप से घटित बताया जाता है वह अन्यत्र भी हुआ है। जिन देशों में इसी तरह की घटनाएं घटी बताई जाती हैं उनके नाम आयरलैंड और वेल्स हैं।
आदिम समय में आयरलैंड के गांव का संगठन कैसा था यह ब्रेहन के आयरलैंड के कानूनों में मिलता है। इन कानूनों से जो प्रतीत होता है उसकी कुछ कल्पना सर हेनरी मेन ख्1, द्वारा दिए गए निम्नलिखित सारांश से हो जाती हैं। हेनरी मेन का कहना हैµ
ब्रेहन का कानून कबीलों की उस अवस्था का चित्रण करता है जब कबीलों अथवा कुल को किसी भूमि पर बसे काफी समय गुजर चुका हो। इसका आकार और महत्त्व इतना अवश्य था कि वह एक राजनीतिक इकाई बन सके और सम्भवतः उनका संरक्षक अनेक प्रमुखों में से एक था, जिसे आयरलैंड के लेखों में राजा कहा गया है। मौलिक अनुमान सत्य है कि जितना भी कबायली क्षेत्र है वह सारे के सारे कबीले का है किंतु वास्तव में इसके बड़े-बड़े हिस्सों पर कबीलों के छोटे-छोटे कुलों का स्थायी अधिकार हो गया है उसका एक हिस्सा मुखिया के लिए निश्चित है और उत्तराधि कार के लिए विशेष नियम के अनुसार उसके उत्तराधिकारियों के लिए दूसरे हिस्से कबीले के अधिकार में हैं, जिनमें से कुछ छोटे मुखियाओं के अधीन हैं, और कुछ ऐसे हैं जिन पर यद्यपि किसी मुखिया का सीधा अधिकार नहीं है तो भी कुलीन वर्ग का कोई न कोई व्यक्ति ही उनका प्रतिनिधित्व करता है। कबीलों की जितनी भूमि पर किसी व्यक्ति विशेष ने अधिकार नहीं किया उस सारी भूमि पर विशेष रूप से कबीले का सामूहिक अधिकार होता है, और सिद्धांत रूप में किसी हिस्से पर भी
- अर्ली हिस्ट्री ऑफ इन्सट्ीटयूशंसµव्याख्यान तीसरा, पृ. 92-93