48 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
अस्थायी अधिकार ही हो सकता है। इस प्रकार का अस्थायी अधिकार प्रायः होता रहता है और इस शर्त पर जमीन पर अधिकार करने वाले कबीले के कबायली लोगों में कुछ ऐसे लोग हैं जो अपने आपको कबायली कहते हैं, किंतु जो वास्तव में मुख्य रूप से पशु चराने के उद्देश्य से आपस में इकट्टे होकर समझौता किये हुए होते हैं। कबायली भूमि के एक बड़े हिस्से पर किसी का भी अधिकार नहीं होता है। वह कबीले की परती भूमि है। इतना होने पर भी इस भूमि पर लगातार खेती होती है या कबायलियों द्वारा स्थायी तौर पर पशु चराये जाते हैं और इस पर विशेष रूप से सीमा की ओर खेती करने तथा काश्तकारों को रहने दिया जाता है। यह उस भूमि का एक हिस्सा है, जिस पर मुखिया का अधिकार लगातार बढ़ता है, और वह अपने फ्फयूदहिरय् या नवागंतुकों को बसाता है, जिनमें किसानों का एक महत्त्वपूर्ण वर्ग है। न्यायवाहृय और छितरे हुए आदमी होते हैं जो उसके साथ सुरक्षा के लिए आते हैं जो उनकी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेता है।
फ्फयूदहिर कौन थेय् सर हेनरी मेन के मतानुसारःµ फ्दूसरे प्रदेशों से आने वाले अथवा शरणार्थीय् जिनका अपने मूल कबीले से संबंध टूट चुका था यह संबंध जो उन्हें अपनी जाति में एक स्थान देता था वे लोग नये स्थान में नये कबीले में जगह पाने के लिए प्रयत्नशील थे। समाज एकदम अस्त-व्यस्त हो गया था। इसका परिणाम यही हुआ कि सारा देश छितरे हुए लोगों के वर्ग से भर गया। इन लोगों के लिए फ्फयूदहिरय् किसान बन जाना ही एक मात्र आश्रय और सुरक्षा पाने का उपाय था।
फ्फयूदहिरय् फ्कबीलेय् का आदमी नहीं था, उस कबीले से पराया व्यक्ति था जिसका संबंध अपने समाज से टूट गया। रक्त संबंध से जुड़े सभी समाजों में उस व्यक्ति की स्थिति बड़ी दयनीय होती थी। किसी भी व्यक्ति की बड़ी ही दुर्दशा होती है जो पराया होता है, जो स्वाभाविक स्थिति है वह तो जाती ही रहती है उनके पास इसके सिवा कोई चारा भी नहीं रहता।
अब वेल्स का उदाहरण लें। श्री सीभोम ने आदिम काल के वेल्स के ग्रामों के संगठन का वर्णन किया है ख्1, । सीभोम के मत के अनुसार वेल्स का गांव परिवारों के घरों का समूह था। परिवार दो भागों में बंटे थे। स्वतंत्र किसानों के घर तथा पराधीन किसानों के घर। श्री सीभोम ने कहा है कि यह पृथक-पृथक निवास वेल्स के आदिम काल के गांवों की सामान्य बात थी। यह पराधीन किसान पृथक और दूरी पर क्यों बसाए
दि ट्राइबल सिस्टम इन वेल्स, पृ. 9
दि ट्राइबल सिस्टम इन वेल्स, पृ. 54-55