अध्याय 6
छितरे लोगों की अलग बस्तियां अन्यत्र कैसे
विलुप्त हो गईं?
यह बात सत्य है कि आयरलैंड के फयूदहिर और वेल्स के अल्त्यूद छितरे लोग थे। यह भी बात ठीक है कि वे पृथक बस्तियों में रहते थे लेकिन यह भी सत्य है कि उन छितरे लोगों की अलग बस्तियां लुप्त हो गईं और वे स्थायी रूप से गांवों में बसी हुई जातियों के भाग या अंग बन गए और उन्हीं में घुल मिल गए। यह एक अनोखी बात है। अभी तक जिस सिद्धांत का प्रतिपादन किया है उसके अनुसार छितरे लोगों को गांव से बाहर इसलिए बसाया गया था क्योंकि वे भिन्न कबीलों के थे। बाद में उन्हें उन कबीनों ने अपने में कैसे शामिल कर लिया? भारत में भी ऐसा क्यों नहीं हुआ? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो स्वाभाविक हैं और जिनका उत्तर मिलना आवश्यक है।
यह प्रश्न ठोस रूप से विकास की उस प्रक्रिया से जुड़ा है जिससे गुजर कर आदिम समाज ने वर्तमान रूप धारण किया है। जैसा पहले भी कहा गया है कि यह विकास दो परिस्थितियों में हुआ है। एक तो आदिम समाज का घुमन्तु होना, दूसरा आदिम समाज का कबायली अवस्था से क्षेत्रगत अवस्था अथवा स्थिरता की अवस्था को प्राप्त होना। जिस प्रश्न से हमें तुरंत संबंध है वह विकास की दूसरी धारा से संबंधित है, क्योंकि रक्त की समानता के स्थान पर क्षेत्र की समानता की एकता का बंधन चुना जाना ही वह कारण है जिससे छितरे लोगों की पृथक बस्तियां नष्ट हो गईं। आदिम समाज ने रक्त की समानता के स्थान पर क्षेत्र की समानता को एकता का बंधन क्यों स्वीकार कर लिया? यह एक प्रश्न है कि जिसका कोई संतोषजनक उत्तर मौजूद नहीं है। परिवर्तन का मूल कारण अज्ञात है। हां यह स्पष्ट है कि यह परिवर्तन कैसे हुआ।
एक खास अवस्था पर पहुंचने पर आदिम समाज में एक नियम बना जिसके अनुसार बाह्य आदमी दल का संबंधी बनकर कबीले में घुल-मिल सकता था। इस