7. छुआछूत की उत्पत्ति का आधर-नस्ल का अंतर - Page 70

अध्याय 7

छुआछूत की उत्पत्ति का आधार-नस्ल का अंतर

छुआछूत का स्रोत क्या है। जैसे पहले कहा गया है कि इस विषय में अभी विचार ही नहीं किया गया है। समाज शास्त्र के किसी भी अध्ययनकर्ता का ध्यान अभी तक इस ओर आकर्षित नहीं हुआ है। समाज शास्त्रियों के अलावा जिन लेखकों ने भारत और उसके लोगों के बारे में लिखा है उन्होंने कमोबेश निंदा के साथ अस्पृश्यता के वर्णन से ही संतोष कर लिया है। जहां तक मैंने देखा है, मुझे केवल एक ऐसा लेखक मिला है जिसने छुआछूत की उत्पत्ति की व्याख्या करने का प्रयत्न किया है। यह लेखक श्री स्टैनले राइस हैं। श्री राइस ख्1, का मत हैµ

इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि अछूत पराजितों के वंशज हैं। ज्यों-ज्यों जाति पेशे के साथ जुड़ती गई वैसे ही वे लोग ढोल बजाने वाले डोम और चमड़े का काम करने वाले चमार या खेत मजदूर आदि जातियों में गिने जाने लगे। आरंभिक समय में वे दास बनाकर इन्हीं जातियों में शामिल कर दिए गए थे। ये आर्यों द्वारा विजित प्रजातियां नहीं थीं। पैरियान यहां के मूल निवासी थे, जिन्हें द्रविड़ों ने जीता था और क्योंकि वे भिन्न नस्ल के थे इसलिए उनको समान जातीय देवकुल में सम्मिलित नहीं किया गया। ऐसा होने से विवाह संबंध अनिवार्य होता और तब खुला मेलजोल होने से नस्ल दोगली और पतित हो जाती। लेकिन यह निषेध पक्का नहीं हो सकता था। हर चीज के अपवाद होते ही हैं। चार हजार वर्षों में समय-समय पर एक नस्ल का दूसरी नस्ल से अनिवार्य रक्त संबंध हुआ, उसने आदि-वासियों और प्राचीन द्रविड़ों के भेद को मिटा दिया होगा। ये लोग हिंदू धर्म में इस प्रकार का निचला स्थान देकर शामिल कर लिए गए हैं। ये उसी वातावरण में इतने समय से रह रहे हैं। साथ ही हिंदू धर्म अत्यंत सहनशील और कठोर धर्म है। यह किसी अन्य धर्मावलंबी को हिंदू नहीं बनाता। जिस प्रकार कोई मुसलमान बन सकता है, उसी प्रकार वह हिंदू नहीं बन सकता। जो धर्म के अंग रहते हैं, उन पर अत्यंत कड़े निषेध लागू होते हैं। लेकिन

  1. हिंदू कस्टम एण्ड दियर ओरिजिन, पृ. 113-115 (इटेलिक्स वाले वाक्यांश)