अध्याय 9
बौद्धों का अपमानµछुआछूत का मूलाधार
1
1870 से हर दस वर्ष बाद जनगणना आयुक्त द्वारा जनगणना की जो रिपोर्ट प्रकाशित की जाती रही है, उसमें भारत की सामाजिक तथा धार्मिक अवस्थाओं के बारे में अन्यत्र कहीं भी उपलब्ध न होने वाली अमूल्य जानकारी उपलब्ध है। 1910 से पहले जनगणना आयुक्त का फ्धर्मानुसार जनसंख्याय् नामक एक लेख रहता था। इस लेख में 1. मुस्लिम, 2. हिंदू, 3. ईसाई आदि की जनसंख्या ही रहती थी। 1910 की जनसंख्या की रिपोर्ट में चालू परम्परा को छोड़ कर नई बात अपनाई गई। प्रथम बार हिंदुओं का तीन भिन्न वर्गों में बंटवारा किया गया (1) हिंदू, (2) अध्यात्मवादी और आदिवासी (3) अछूत। तब से यह नवीन वर्गीकरण प्रचलित है।
2
पहले की जनसंख्या की परंपरा को बदल देने से तीन प्रश्न पैदा होते हैंः पहला, 1910 को जनगणना के आयुक्त ने यह नया वर्गीकरण क्यों किया? दूसरा यह कि अपनाए गए वर्गीकरण का आधार क्या था? तीसरा यह कि वे कौन से कारण थे जिनसे कुछ ऐसे रीति-रिवाजों का विकास हुआ जिनसे हिन्दुओं को तीन भिन्न वर्गों में विभाजित करना उचित माना गया।
पहले प्रश्न का उत्तर हमें उस भाषण में मिलता है जो 1909 में आगा खान के नेतृत्व में मुसलमानों ने उस समय के वाइसराय लार्ड मिन्टो के समय में दिया, उसमें मुसलमानों ने अपने लिए, विधानमण्डल, कार्यपालिका तथा सरकारी नौकरियों में पृथक और पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग की थी। उस भाषण से निम्नलिखित अंश उद्धृत किया ख्1, जा रहा है।
- अविकल पाठ मेरी पुस्तक पाकिस्तान में देखें, पृष्ठ 431