80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
फ्1909 की जनगणना अनुसार भारत के मुसलमानों की संख्या 6 करोड़ 20 लाख से ऊपर है। अर्थात् सरकार बहादुर की भारतीय प्रजा के चौथे और पांचवे हिस्से के बीच में। यदि अध्यात्मवादी तथा दूसरे छोटे-मोटे धर्मावलम्बियों के लेख में आने वाली असभ्य जातियां और जो वास्तव में हिंदू न होने पर भी हिंदू गिने जाते हैं, उन्हें बाहर कर दिया जाए तो हिंदू जनसंख्या की तुलना में मुसलमानों का अनुपात बहुत बढ़ ख्1, जाएगा। इसलिए हम यह निवेदन करना उचित समझते हैं कि प्रतिनिधित्व की किसी भी विस्तृत अथवा संकुचित पद्धति में एक ऐसी जाति जिसकी जनसंख्या रूस को छोड़कर किसी भी प्रथम दर्जे के यूरोपीय शक्ति की जनसंख्या से अधिक है, उचित तौर पर यह मांग कर सकती है कि उसे राज्य में एक महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त हो ख्1, ।
फ्हम सरकार बहादुर की आज्ञा से एक कदम आगे जाकर यह आग्रह करना चाहते हैं कि प्रत्यक्ष या परोक्ष किसी भी प्रकार के प्रतिनिधित्व में और अन्य सब बातों में जिनका उनके पत्र और प्रभाव से संबंध हो, मुस्लिम जाति को जो पद मिले वह उनकी जनसंख्या के ही अनुरूप नहीं बल्कि उनके राजकीय महत्व तथा साम्राज्य की रक्षा में उनसे जो सहायता मिलती है उसके भी अनुरूप होना चाहिए। हमें यह भी आशा है कि इस विषय में सरकार इस बात को और भी ध्यान देगी कि सौ वर्ष से कुछ ही अधिक समय पहले भारत में मुसलमानों की क्या स्थिति रही है और यह कि उसकी याद उनके दिलों से स्वाभाविक तौर पर मिट नहीं गई है।य्
इटेलिक्स में दिए गए कुछ शब्दों का गूढ़ार्थ है। ये शब्द भाषण में यही बात सुझाने के लिए दिए गए हैं कि हिंदुओं के साथ मुसलमानों की तुलना करते समय हिंदुओं की जनसंख्या में से अध्यात्मवादी आदिवासी तथा अछूतों की जनसंख्या कम कर दी जाए। इसका कारण 1910 में जनगणना आयुक्त ने हिंदुओं के वर्गीकरण की जो यह नई पद्धति स्वीकार की उसका आधार मुसलमानों के लिए पृथक प्रतिनिधित्व में वृद्धि की मांग की है। हिंदुओं ने इस मांग का अर्थ यही लिया था। ख्2,
पहले प्रश्न के बारे में यह रुचिकर है कि जनगणना आयुक्त ने वर्गीकरण की यह नई पद्धति क्यों अपनाई उतना महत्त्वपूर्ण नहीं जितना दूसरा प्रश्न। जानने की महत्त्वपूर्ण बात यह है कि जनगणना आयुक्त ने हिंदुओं को भिन्न-भिन्न वर्गों में किस आधार
इटेलिक्स में दिए गए वाक्यांश मूल नहीं हैं।
मुस्लिम सम्प्रदाय द्वारा 1909 में लार्ड मिंटो को दिए गए ज्ञापन के बाद कार्रवाई हुई जिसमें मुसलमानों के लिए पृथक और पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग की गई थी। हिंदुओं को दाल में काला नजर आया क्योंकि जनगणना आयुक्त का कहना थाःµ
संयोग से जांच से उग्रता उत्पन्न हुई क्योंकि वह दुर्भाग्य से ऐसे समय की गई जब हिंदुओं को आशंका हुई कि हिंदुओं के कुछ वर्गों को पृथक मान लिया जाएगा और उनके राजनीतिक महत्व पर प्रभाव पड़ेगा। भाग 1, पृष्ठ 116।