अध्यायः 7
पाकिस्तान का हिंदू विकल्प
I
पाकिस्तान के हिंदू विकल्प पर विचार करते समय स्वर्गीय लाला हरदयाल द्वारा 1925 में प्रस्तुत योजना का स्मरण हो आता है। यह योजना एक वक्तव्य के रूप में लाहौर के ‘प्रताप’ समाचारपत्र में प्रकाशित हुई थी। इस वक्तव्य में, जिसे लाला हरदयाल ने अपने राजनीतिक वसीयतनामे की संज्ञा दी थी, कहा गया थाः
फ्मैं यह घोषणा करता हूं कि हिंदू जाति, हिंदुस्तान और पंजाब का भविष्य
इन चार स्तंभों पर आधारित हैः (1) हिंदू संगठन, (2) हिंदू राज, (3)
मुस्लिमों की शुद्धि, और (4) अफगानिस्तान तथा सीमावर्ती क्षेत्रों पर विजय
और उनका शुद्धिकरण। जब तक हिंदू जाति ये चारों बातें पूरा नहीं कर
लेगी, तब तक हमारी भावी संतानों की सुरक्षा पर हमेशा खतरा मंडराता
रहेगा और हिंदू जाति की सुरक्षा असंभव हो जाएगी। हिंदू जाति का एक
ही इतिहास है और उसकी सभी संस्थाएं समरूपी या सजातीय हैं। परंतु
मुसलमान और ईसाई हिंदुत्व की सीमाओं से बहुत परे हैं, क्योंकि उनके
धर्म विदेशी हैं और वे फारसी, अरब और यूरोपियन संस्थाओं से प्यार करते
हैं। अतः जैसे हम आंख में पड़ी किरकिरी को निकाल देते हैं, उसी तरह
इन दोनों धर्मों की शुद्धि की जानी चाहिए। अफगानिस्तान और हमारे सीमांत
के पहाड़ी क्षेत्र पहले भारत का ही अंग थे, परंतु आजकल वहां इस्लाम
का प्रभुत्व है... जैसे नेपाल में हिंदू धर्म है, उसी तरह अफगानिस्तान और
सीमांत क्षेत्रों में भी हिंदू संस्थाएं होनी चाहिए, अन्यथा स्वराज पाना व्यर्थ
होगा। चूंकि पहाड़ी कबायली हमेशा युद्धप्रिय और भूखे होते हैं, इसलिए
यदि वे हमारे शत्रु बन गए तो नादिरशाह और ज़मानशाह का जमाना फिर
से वापस आ जाएगा। आजकल अंग्रेज अधिकारी सीमाओं की रक्षा कर रहे
हैं। परंतु यह हमेशा के लिए नहीं हो सकता... यदि हिंदू अपनी रक्षा करना