लीग की मांगे क्या हैं?
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पार का सिंध (कराची को छोड़कर) शामिल होते। लिटन का यह भी सुझाव था कि बंबई में पूरा मध्य प्रांत या उसका एक भाग शामिल किया जाना चाहिए ताकि सिंधु नदी के पार के सिंध की भरपाई हो सके। ये प्रस्ताव सेक्रेट्री ऑफ स्टेट के मंजूर नहीं किए। जब लॉर्ड लेंसडाउन वायरस थे (1988-94) तो यही परियोजना, अर्थात् सिंध को पंजाब में मिलाने का सुझाव, अपने मूल रूप में पुनर्जीवित हुआ, परंतु बलूचिस्तान एजेंसी का गठन होने के कारण सिंध एक सीमांत जिला नहीं रहा और उस विचार ने जो अपने मकसद में सामरिक था, अपना दावा खो दिया और सिंध पंजाब में शामिल नहीं किया जा सका। यदि अंग्रेजों ने बलूचिस्तान अधिगृहीत नहीं किया होता और लॉर्ड कर्जन ने पंजाब से उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत को अलग करने का विचार नहीं बनाया होता तो बहुत पहले ही पाकिस्तान एक प्रशासनिक इकाई के रूप में सामने आ गया होता। जहां बंगाल में एक राष्ट्रीय मुस्लिम राज्य के निर्माण के दावे का मामला है, इसमें भी कोई नई बात नहीं है। अनेक लोगों को याद होगा कि 1905 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन ने बंगाल और आसाम, को इन दो प्रांतों में विभाजित किया था - 1. पूर्वी बंगाल और आसाम, जिसकी राजधानी ढाका थी, और 2. पश्चिमी बंगाल, जिसकी राजधानी कलकत्ता थी। पूर्वी बंगाल और आसाम के नए प्रांत में आसाम शामिल था और बंगाल तथा आसाम के ये पुराने जिले शामिल थे -
- ढाका, 2. मैमन सिंह, 3. फरीदपुर, 4. बाकरगंज, 5. टिपरा, 6. नोआखली, 7. चिटगांव, 8. चिटगांव पहाड़ी क्षेत्र, 9. राजशाही, 10. दिनाजपुर, 11. जलपाईगुड़ी,
- रंगपुर, 13. वोगस, 14. पटना और 15. मालदा। पश्चिम बंगाल में पुराने बंगाल प्रांत के शेष जिले और आसाम के अन्य जिलों के अलावा मध्यप्रांत का संबलपुर जिला पश्चिम बंगाल को दिया गया था।
एक प्रांत का दो भागों में बंटवारा, जिसे भारतीय इतिहास में बंगाल का विभार न कहा जाता है, पूर्वी बंगाल में एक प्रकार से एक मुस्लिम राज्य के गठन का ही प्रयास था, क्योंकि पूर्वी बंगाल और आसाम का नया प्रांत असम के भागों को छोड़कर एक मुस्लिम बहुल राज्य ही था। किंतु हिंदुओं के प्रबल विरोध के कारण ब्रिटिश सरकार ने 1911 में यह विभाजन रद्द कर दिया, क्योंकि वह हिंदुओं के सामने झुक गई और उसने मुसलमानों की इच्छा की परवाह नहीं की। क्योंकि वे अपनी आवाज उठाने के लिहाज से काफी कमजोर थे। यदि बंगाल का विभाजन उस समय रद्द नहीं हुआ होता, तो पूर्वी बंगाल में मुस्लिम राज्य एक नई परियोजना नहीं होती, बल्कि वह 39 वर्ष पुराना राज्य हो गया होता।ऽ