8 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
III
क्या हिंदुस्तान से पाकिस्तान के अलग हो जाने का विचार घातक है? यदि ऐसा है, तो मैं उन तथ्यों का स्मरण कराना चाहूंगा जो उन मुद्दों से संगति रखते हैं जो कांग्रेस की नीति के बुनियादी सिद्धांत के अनुरूप हैं। यह स्मरण करना होगा कि श्री गांधी ज्यों ही कांग्रेस पर काबिज हुए, उन्होंने इसे लोकप्रिय बनाने के लिए दो काम किए। इनमें से पहला था सविनय अवज्ञा का श्रीगणेश।
भारतीय राजनीति में श्री गांधी के पदार्पण से पहले सत्ता प्राप्ति के लिए सक्रिय पक्ष थेः कांग्रेस, लिबरल्स (उदारवादी) और बंगाल के आतंकवादी (क्रांतिकारी)। कांग्रेस और लिबरल्स एक ही पार्टी थे और उनके बीच आज की तरह कोई अंतर नहीं था। अतएव हम निरापद रूप से कह सकते हैं कि भारत में मात्र दो दल थे - उदारवादी और आतंकवादी। इन दोनों दलों में प्रवेश की शर्त बड़ी कठोर थी। लिबरल (उदारवादी) पार्टी में प्रवेश की शर्त मात्र शिक्षा ही नहीं, अपितु उच्चस्तरीय ज्ञान भी था। अध्ययन की दृष्टि से सुप्रतिष्ठित हुए बिना कोई भी लिबरल पार्टी की सदस्यता लेने की कल्पना नहीं कर सकता था। उस दल ने अशिक्षितों को राजनीतिक सत्ता प्राप्त करने से प्रभावी ढंग से रोका था। आतंकवादियों ने, जहां तक भी सोचा जा सकता है, कठोरतम परीक्षा लेने का मार्ग निर्धारित किया था। केवल वही लोग, जो उद्देश्य के लिए अपना जीवन ही नहीं, प्राण भी समर्पित करने को तैयार होते थे, उनके संगठन के सदस्य बन सकते थे। अतएव कोई भी भीरू या पाखंडी आतंकवादी (क्रांतिकारी) संगठन में प्रवेश नहीं पा सकता था। सविनय अवज्ञा के लिए किसी ज्ञान या अध्ययन की जरूरत नहीं है। इसमें जीवन न्यौछावर करने का भी आह्वान नहीं है। यह उस विशाल बहुमत के लिए एक सरल मध्यम मार्ग है, जिसने कोई विद्वता हासिल नहीं की और जो यातना की पराकाष्ठा झेलने को भी तैयार नहीं, साथ ही देशभक्त होने का पाखंड भी कर सकता है। इस मध्यम मार्ग ने ही कांग्रेस को लिबरल पार्टी और आतंकवादी (क्रांतिकारी) पार्टी की तुलना में अधिक लोकप्रिय बनाया।
श्री गांधी ने जो दूसरी बात की, वह भाषाई राज्यों के सिद्धांत को लागू करना था। श्री गांधी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में जो संविधान कांग्रेस ने बनाया, उसके अंतर्गत भारत को भाषायी आधार पर निम्नलिखित प्रांतों में विभाजित किया गया, जिनके मुख्यालय भी यहां उल्लिखित हैंः
ऽ भारत सरकार की गजट अधिसूचना क्रम-संख्या 2832, दिनांक 1 सितंबर, 1905. 16 अक्तूबर, 1905
से ये दो प्रांत पृथक प्रशासनिक इकाइयां बन गए।