विदेशों से सीख
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यही है कि उसकी बीमारी के वर्णन के लिए उसे रुग्ण व्यक्ति कहने के
बजाए केंचुली बदलते हुए सर्प से उसकी उपमा दी जाए, क्योंकि यही
अधिक उपयुक्त है।य्ऽ
इस लिहाज से तुर्की द्वारा अपने अधिकृत क्षेत्रों को गंवाना एक असामान्य अपवृद्धि को हटाना और नई त्वचा को ही पाना है। तुर्की निश्चय ही सजातीय है और उसे भीतर से किसी भी विघटन का भय नहीं है।
मुस्लिम क्षेत्र हिंदुस्तान के लिए सामान्य मोटापे जैसा ही है, और हिंदुस्तान उन पर असामान्य अपवृद्धि जैसा है। साथ बंधे रहने से वे भारत को एशिया का रुग्ण पुरुष बना देंगे। साथ बंधकर वे भारत को एक विधि जातीय इकाई ही बनाएंगे। पाकिस्तान का गठन यदि भारत के कुछ भागों को अलग कर देने वाली बुराई है, तो उसका एक लाभ भी है, और वह यह है कि उसके बनने से संघर्ष के स्थान पर सौहार्द का सृजन होगा।
दो भागों में बंट जाने से प्रत्येक भाग अधिक सजातीय इकाई बन जाएगा। दोनों क्षेत्रों की एकरूपता पर्याप्त स्पष्ट है। प्रत्येक की अपनी सांस्कृतिक इकाई है। प्रत्येक में धार्मिक एकता है। पाकिस्तान में भाषायी एकता है। यदि हिंदुस्तान में ऐसी एकता नहीं है तो उसे हिंदुस्तानी, हिंदी अथवा उर्दू में से कोई एक सांझी भाषा अपनाने पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। विभाजित होने के बाद प्रत्येक एक सबल और सुगठित राज्य बन सकेगा। भारत को एक सुदृढ़ केंद्रीय सरकार की आवश्यकता है, किंतु वहां तब तक ऐसी सरकार नहीं हो सकती, जब तक पाकिस्तान भारत का भाग बना रहेगा। भारत सरकार के 1935 के अधिनियम में समाहित संघीय सरकार के ढांचे की तुलना करें तो हम पाएंगे कि केंद्रीय सरकार एक अशक्त, जर्जर और ऐसी वस्तु के समान है जो लगभग निष्प्राण है। [†] जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है, केंद्रीय सरकार को कमजोर करना मुस्लिम प्रांतों को संतुष्ट करने की इच्छा से ही प्रेरित है। वे केंद्रीय सरकार को अपने स्वरूप और गठन में हिंदू प्रभुत्ववाली मानते हैं और इसलिए उसके प्राधिकार से स्वतंत्र होना चाहते हैं। जब पाकिस्तान बन जाएगा, तो उक्त विचार में कोई दम नहीं रहेगा। तब हिंदुस्तान एक सुदृढ़ केंद्रीय सरकार के अंतर्गत होगा जो राज्य की स्थिरता के लिए आवश्यक तत्व है। किंतु इनमें से किसी को भी तब तक प्राप्त नहीं किया जा सकता, जब तक पाकिस्तान हिंदुस्तान से अलग नहीं हो जाता।
ऽ आर्नोल्ड टोयनबी, ‘टर्की’, पृ. 141
† इस विषय पर और अधिक जानकारी के लिए मेरा ‘फेडरेशन बनाम फ्रीडम ट्रैक्ट’ देखें।