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212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

स्पष्ट ही है कि चेकों ने ऐतिहासिक भावनाओं के वेग में बहने से इन्कार कर दिया था। वे संकुचित सीमाओं और एक लघु चेकोस्लोवाकिया को स्वीकार करने के लिए तैयार हो गए, ताकि जनता को विनाश से बचाया जा सके।

तुर्की के बारे में एक धारणा प्रचलित थी, जिसे जार निकोलस प्रथम ने 18 मई को सेंट पीटर्सबर्ग में ब्रिटिश राजदूत से वार्तालाप के दौरान अभिव्यक्त किया था। उन्होंने कहा था-फ्हमारे हाथ में एक रुग्ण व्यक्ति है, बहुत अधिक रुग्ण व्यक्ति, हमारे हाथों में ही अचानक दम तोड़ सकता है।’’ उसी दिन से उस तुर्की, जो यूरोप का रुग्ण व्यक्ति था, के निधन के सभी पड़ोसियों को प्रतीक्षा थी। उसके सीमा-क्षेत्रों का परित्याग इस दम तोड़ते हुए व्यक्ति की ऐंठन माना जा रहा था, जिसने सेवर्स की संधि पर हस्ताक्षर करते हुए अंतिम सांस ली थी।

क्या तुर्की साम्राज्य के नष्ट होने की प्रक्रिया का वास्तव में यह सही सोच है? इस बारे में आर्नोल्ड टोयनबी की टिप्पणियों पर ध्यान देना शिक्षाप्रद होगा। जार ने यह कहा था कि तुर्की एक ऐसा रुग्ण व्यक्ति है, जो कभी भी दम तोड़ सकता है। टोयनबी के अनुसारः

फ्जार निकोलस अपने इस द्वितीय और अधिक सनसनीपूर्ण भाग का निरूपण

करने में भटक गए, क्योंकि उन्होंने रोग के लक्षणों के स्वरूपों को नहीं

समझा। यदि कोई व्यक्ति जो कि प्राकृतिक इतिहास से पूर्णतः अनभिज्ञ है,

सांप के केंचुली छोड़ते समय उसके ऊपर गिर जाए, तो वह बड़े विश्वास

के साथ यह कह देगा कि अब संभवतः वह जीव ठीक नहीं हो सकता।

वह यही कहेगा कि जब किसी मनुष्य (अथवा अन्य स्तनपायी प्राणी)

को दुर्भाग्य से अपनी खाल गंवानी पड़े, तो ऐसा कभी नहीं सुना गया कि

वह जीवित बच गया। फिर भी, जहां यह पूर्णतः सत्य है कि तेंदुआ अपने

धब्बे नहीं बदल सकता और न ही इथिपिआई अपनी खाल बदल सकता

है, एक वृहत्तर अध्ययन से हमारे नौसिखिया जीवविज्ञानी को यह जानकारी

मिल जाती कि सर्प दोनों ही काम कर सकता है, और वह स्वाभाविक

तौर पर ही ऐसा करता है। निस्संदेह, सर्प के लिए भी यह प्रक्रिया जटिल

और असुविधाजनक है। वह अस्थाई तौर पर तंद्रालु हो जाता है और उस

सिथति में उसके सामने यह भयावह स्थिति आ जाती है कि वह अपने

शत्रुओं की दया पर ही निर्भर हो जाए। फिर भी यदि वह चील, कौओं से

तब तक बचा रहता है जब तक कि उसका रूपांतरण पूर्ण नहीं हो जाता,

तो वह न सिर्फ पूर्णतः स्वस्थ हो जाता है, अपितु अपनी नश्वर केंचुली

को बदलकर पूर्णतः नया हो जाता है। तुर्की के बारे में हाल का अनुभव