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सामाजिक निष्क्रियता

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फिर अपने लिए खतरा समझने लगेंगे। यदि यही होना है तो स्पष्ट उपचार पाकिस्तान ही है। खतरों के मुख्य कारक को यह समाप्त कर देता है। पाकिस्तान का निर्माण हिन्दू और मुसलमान दोनों को ही एक दूसरे की गुलामी और अनधिकृत आक्रमण की आशंका से मुक्त कर देता है। इससे हिन्दुस्तान अैर पाकिस्तान के लिए अलग-अलग संविधान का प्रावधान हो जाता है, जिससे दैनिक जीवन में संतुलन कायम रखने के लिए चल रहे लगातार संघर्ष का आधार ही समाप्त हो जाता है। सामाजिक महत्व के अत्यावश्यक विषयों को, जिन्हें इस समय वे बक्से में बंद कर देने को बाध्य हैं, लेकर अब उन्हें अपनी जनता के जीवन में सुधार लाने का अवसर प्राप्त हो जाता है। आखिर स्वराज्य के लिए यह जो संघर्ष चलाया जा रहा है, उसका लक्ष्य भी तो यही सुधार है।

किसी ऐसी व्यवस्था की अनुपस्थिति में हिन्दू और मुसलमान ऐसी क्रिया और प्रतिक्रिया करते रहेंगे, मानों वे दो अलग-अलग राष्ट्र हैं। दोनों आशंकित रहेंगे कि दूसरा उन पर विजय तो प्राप्त नहीं कर लेता। सामाजिक पुनःनिर्माण के बजाए हमेशा आक्रमण की तैयारियों को तरजीह दी जाती रहेगी तथा इस प्रकार सामाजिक यथास्थिति बनी रहेगी। किसी को इस पर आश्चर्य करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह बहुत ही स्वाभाविक बात है। जैसा कि जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने इंगित किया है-

फ्एक विजित राष्ट्र कैंसर-ग्रस्त मनुष्य की तरह होता है_ वह अन्य किसी

विषय पर नहीं सोच सकता है।.................। एक स्वस्थ राष्ट्र अपनी राष्ट्रीयता

के विषय में उसी प्रकार अचेत रहता है जिस प्रकार एक स्वस्थ मनुष्य

अपनी ह्यिस्त्रयों के विषय में। परन्तु यदि किसी राष्ट्र की राष्ट्रीयता को आप

भंग कर देते हैं, तब उसकी चिंता इसे पुनः स्थापित करने की होगी। वह

तब किसी सुधारक की बात पर ध्यान नहीं देगा, किसी दार्शनिक की बात

नहीं सुनेगा, किसी धर्मोपदेशक की बात नहीं मानेगा, जब तक कि उसकी

राष्ट्रीयता की मांग स्वीकृत नहीं हो जाती। वह एकता स्थापित करने और

मुक्ति प्राप्त करने के कार्यों के अतिरिक्त सभी अत्यावश्यक कार्यों की

अवहेलना करेगा।य्

जब तक हिंदुओं से अपने को अलग रखने की मांग करने वाले मुसलमानों का पृथक राष्ट्र के रूप में एकीकरण नहीं हो जाता, और अपने ऊपर दूसरे के आधिपत्य हो जाने की आशंका से दोनों को ही मुक्ति नहीं मिल जाती, सामाजिक निष्क्रियता की इस बुराई को दूर नहीं किया जा सकता। इस बात में संदेह की गुंजाइश नहीं है।