250 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
प्रांतीय विधान परिषदों में मुस्लिम प्रतिनिधित्व के सम्बन्ध में तय हुआ कि यह इस प्रकार होगा ख्1, -
प्रांत प्रांतीय विधायिकाओं में, निर्वाचित
भारतीय सदस्यों का अनुपात
पंजाब 50
संयुत्तQ प्रांत 30
बंगाल 40
बिहार तथा उड़ीसा 25
मध्य प्रांत 15
मद्रास 15
बम्बई 13
इस अनुपात में मुसलमानों की सीटें स्वीकृत करने के साथ ही, सामान्य निर्वाचक-मंडल के आधार पर उनके द्वितीय मत देने का अधिकार समाप्त कर दिया गया। यह अधिकार 1909 ई. के अधिनियम के तहत उन्हें प्राप्त था।
मौन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड प्रतिवेदन में लखनऊ समझौते की आलोचना की गयी है। परन्तु यह समझौता दोनों पक्षों के बीच होने के कारण, सरकार ने इसे रद्द कर स्वयं अपना निर्णय लागू करना उचित नहीं समझा। समझौते की दोनों ही धाराओं को सरकार द्व ारा स्वीकार कर लिया गया और 1919 के भारत सरकार अधिनियम में उन्हें शामिल कर दिया गया। कानून बनाने से सम्बन्धित खण्ड को लागू किया गया, किन्तु दूसरे तरीके से। ऐसी व्यवस्था की गयी कि विधायिका के सदस्यों पर विरोध करने का दायित्व नहीं रह गया, बल्कि इसके बजाय उन विधानों को जिनका सम्बन्ध भारत में ब्रिटिश प्रजा के किसी भी वर्ग के धर्म या धार्मिक रीति-रिवाजों और परम्पराओं से हो, भारतीय विधान-मंडलों के किसी भी सदन में प्रस्तावित ख्2, करने से पूर्व, गवर्नर जनरल की पूर्वानुमानित आवश्यक होगी।
प्रतिनिधित्व से सम्बन्धित खण्ड को सरकार ने मान लिया यद्यपि उसकी राय में पंजाब और बंगाल के मुसलमानों के साथ इसमें पूर्ण न्याय नहीं हुआ था।
- मुस्लिम महिला की स्थिति के लिए देखिए श्याम कुमार नेहरू द्वारा संपादित ‘अवर काज़’।
- भारत सरकार अधिनियम, 1919 धारा 67 (2) (ख)