12. राष्ट्रीय कुंठा - Page 365

356 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

1867 में फ्रेंच कनाडा जैसा था, आज भी वह बहुत कुछ वैसा ही है। आज भी वह उन्हीं विश्वासों, रीति-रिवाजों और संस्थानों पर चल रहा है जिनको अंगे्रजी प्रांतों में कोई नहीं मानता। उनके अपने विशिष्ट विचार और धारणाएं हैं और अपने ही महत्वपूर्ण मूल्य हैं। उदाहरण के लिए, विवाह और तलाक के बारे में उनका दृष्टिकोण न केवल शेष कनाडा, बल्कि एंग्लो-सैक्सन उत्तरी अमरीकावासियों के आम दृष्टिकोण के विपरीत है।

* * *

कनाडा के सबसे बड़े शहर मोंट्रियल में दोनों समुदायों के लोगों के बीच आपसी मेल-मिलाप का न होना देखा जा सकता है। लगभग 63 प्रतिशत आबादी फ्रेंच है और 24 प्रतिशत ब्रिटिश। यदि मेल-मिलाप की कहीं पर गुंजाइश है तो यहां पर वह काफी है, परंतु वास्तविकता यह है कि व्यवस्था और राजनीतिक कारणों को छोड़कर, जो उन्हें साथ रहने के लिए बाध्य करते हैं, वे एक दूसरे से विमुख रहते हैं। उनके अपने ही आवासीय क्षेत्र हैं, अपने-अपने वाणिज्यिक केंद्र हैं और उनमें से अंगे्रजों की जातीय पृथकता की भावना दृश्टव्य है।

* * *

मोंट्रियल के अंगे्रजी बोलने वाले निवासियों ने कुल मिलाकर अपने फ्रांसीसी भाषी नागरिकों की भाषा सीखने, उनकी परंपराओं को समझने, उत्सुकतापूर्वक उनका निरीक्षण करने तथा उनके गुण-दोषों के प्रति सहानुभूति प्रकट करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। भाषायी रोड़ों ने दोनों समुदायों के लोगों के अलग-अलग रहने को और उकसाया। 1921 में हुई जनगणना से इस तथ्य का पता चला कि फ्रांसीसी मूल के लगभग 50 प्रतिशत कनाडावासी अंगे्रजी बोलने में असमर्थ हैं और ब्रिटिश मूल के 95 प्रतिशत लोग फ्रांसीसी भाषा नहीं बोल सकते। यहां तक कि मोंट्रियल में भी 70 प्रतिशत ब्रिटिश मूल के लोग फ्रेंच नहीं बोल सकते और 30 प्रतिशत फ्रेंच अंगे्रजी नहीं बोल सकते। एक आम भाषा के अभाव में दोनों राष्ट्रीयताओं के बीच जो खाई बनी हुई है, वह उन्हें एक होने से रोकती है।

कांफेडरेशन का महत्व यह है कि इसने एक सरकारी तंत्र को जन्म दिया है, जिसके कारण फ्रांसीसियों को ब्रिटिशों के साथ सुखी, सहभागी और अपना विशिष्ट राष्ट्रीय जीवन कायम रखने तथा कनाडा की सुपर नागरिकता पाने और समग्र रूप से अपने समूह से ऊपर उस राष्ट्र के प्रति निष्ठावान रहने में सक्षम बनाया है।