पाकिस्तान की समस्याएं
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तुर्की और ग्रीस के मध्य जनसंख्या के स्थानांतरण का प्रयोग कार्य-रूप में परिणित किया गया। कोई भी इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि इसने काम किया है। इसका परीक्षण किया गया और काम करने योग्य पाया गया। यह योजना, जिसकी रूपरेखा मैंने प्रस्तुत की है, उसी योजना की एक प्रतिलिपि है। इसके द्वारा ग्रीस और बल्गारिया तथा तुर्की और ग्रीस की जनसंख्या के स्थानांतरणऽ का मामला तय होने में पर्याप्त सहायता मिली है। कोई भी व्यक्ति इससे इंकार नहीं कर सकता कि इसका कार्यान्वयन असाधारण सफलता से हुआ। जिसके कार्यान्वयन में अन्यत्र सफलता की उपलब्धि हुई, भारत में भी उसके कार्यान्वयन की सफलता की आशा की जा सकती है।
पाकिस्तान का मुद्दा साधारण मामला नहीं है। परंतु यह इतना कठिन भी नहीं है, जैसा कि इसे बनाया जा रहा है बशर्ते कि इसके लिए परस्पर स्वीकृत सिद्धांत और नीति बनाई जाए। यदि यह कठिन है तो उसका कारण केवल यह है कि यह दिल दुखाने वाला है और कोई भी व्यक्ति इसकी समस्याओं और समाधानों पर विचार नहीं करता, क्योंकि इसका विचार मात्र ही पीड़ादायक है। परंतु जब एक बार जहां भावना समाप्त हो गयी है और यह निश्चित कर लिया गया कि पाकिस्तान अवश्य होगा, तो इससे उत्पन्न समस्याएं न तो विचलित करने वाली होंगी और न असाध्य।
ऽ जो लोग जनसंख्या के स्थानांतरण के बारे में और अधिक जानकारी पाना चाहते हैं, उनको स्टीफन पी.
लॉड्स द्वारा लिखित ‘दि एक्सचेंज ऑफ माइनास्टिज, बल्गेरिया, ग्रीस एंड टर्की’, 1932 पढ़कर काफी
जानकारी मिल सकती है। इस योजना द्वारा ग्रीस और बल्गारिया के बीच तथा ग्रीस और तुर्की के बीच
जनसंख्या के स्थानांतरण की योजना पूर्णतः हल कर ली गई थी।