14. पाकिस्तान की समस्याएं - Page 402

अध्यायः 15

कौन निर्णय कर सकता है?

पाकिस्तान के प्रश्न के दो पक्ष हैं-हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष। इसे टाला नहीं जा सकता। दुर्भाग्यवश दोनों ही पक्षों ने समझदारी नहीं दिखाई है। दोनों भावना में डुबे हुए हैं। वे इतनी बुरी तरह भावनाओं में डुबे हुए हैं कि उन्हें उस समय समझाना बहुत कठिन है। ये विरोधी भावनाएं क्षीण हो जाएंगी या प्रगाढ़, यह समय और परिस्थितियां ही बता सकेंगी। कब तक भारतीयों को इस बर्फ के पिघलने की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी, इसकी कोई भी भविष्यवाणी नहीं कर सकता। परंतु एक बात निश्चित है कि जब तक यह बर्फ पिघती नहीं है, स्वतंत्रता का कोई अस्तित्व नहीं है। मुझे विश्वास है कि लाखों ऐसे विचारशील भारतीय होंगे, जो भारतीय स्वतंत्रता को अनिश्चित काल तक टालने के कंट्टर विरोधी है-जब तक कि पाकिस्तान का एक आदर्शमय और स्थायी समाधान उपलब्ध न हो जाये। उनमें से मैं भी एक हूं जो यह विश्वास करते हैं कि यदि पाकिस्तान एक समस्या है और एक ढोंग नहीं है, तो इससे भागा नहीं जा सकता और इसके लिए एक समाधान खोजना चाहिए। मैं उनमे से एक हूं जो यह विश्वास करते हैं कि जो अपरिहार्य है, उसका सामना करना चाहिए। आपके चारों तरफ जो हो रहा है, उससे इसलिए आंखें बंद कर लेना ठीक नहीं क्योंकि उससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुचेंगी। मैं उनमें से एक हूं जो इस बात पर विश्वास करते हैं कि व्यक्ति को यदि वह समाधान चाहता है तो निर्णय लेने में पहले तैयार रहना चाहिए। यदि यह मालूम है कि नदी पार करनी ही पड़ेगी तो एक पुल का निर्माण करना बुद्धिमानी है।

पाकिस्तान की मुख्य समस्या यह है कि इस बात का निर्णय कौन करे कि पाकिस्तान बनना चाहिए अथवा नहीं। मैं गत तीन वर्षों से इस विषय पर मनन कर रहा हूं और इस प्रश्न का यथेष्ट उत्तर देने के लिए कुछ निष्कर्षों पर पहुंचा हूं। इन निष्कर्षों पर मैं उन लोगों के साथ विचार करना चाहूंगा जो इस समस्या के समाधान में रुचि रखते है, जिसके फलस्वरूप आगे और समाधान निकाला जा सके और खोज