394 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
की जा सके। इन निष्कर्षों का स्पष्टीकरण करने के लिए मैंने सोचा है कि यह अच्छा होगा यदि मैं उन्हें संसद के कानून के रूप में प्रस्तुत करूं। इस उपनियम का प्रारूप इस प्रकार है, जिसमें मेरे निष्कर्ष दिये गये हैंः
भारत सरकार (प्रारंभिक उपबंध) अधिनियम
महामहिम सम्राट के आधिपत्य, लॉर्डस और कामंस के परामर्श और अनुमति से इस वर्तमान संसद में निम्नलिखित अधिनियमित किया जाए-
I . (1) यदि उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत, पंजाब, सिंध और बंगाल प्रांतों के विधान
मंडलों के मुस्लिम सदस्य इस संबंध में निर्धारित तारीख के छः महीने के
भीतर बहुमत से यह संकल्प पारित कर देते हैं कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों
को ब्रिटिश इंडिया से पृथक किया जाए, तो महामहिम इस अधिनियम के
उपबंधों के अनुसार इन प्रांतों और बलूचिस्तान के मुस्लिम और गैर-मुस्लिम
मतदाताओं के बीच इस मुद्दे पर मतदान कराएंगे।
(2) इन प्रांतों में मतदाताओं से निम्नलिखित रूप में प्रश्न पूछे जाएंगेः
(क) क्या आप ब्रिटिश इंडिया से पृथक होने के हक में हैं?
(ख) क्या आप पृथक्करण का विरोध करते हैं?
(3) मुस्लिम और गैर-मुस्लिम मतदाताओं के मतदान पृथक-पृथक
कराये जायेंगे।
II . (1) यदि मतदान के परिणामस्वरूप यह पाया जाता है कि मुस्लिम
मतदाताओं का बहुमत पृथक्करण के पक्ष में हैं और गैर-मुस्लिम मतदाताओं
का बहुमत पृथक्करण के पक्ष में है और गैर-मुस्लिम मतदाताओं का बहुमत
पृथक्करण का विरोध करता है तो महामहिम उन प्रांतों के उन जिलों और
क्षेत्रों की जिनके निवासियों में मुस्लिम बहुमत में है, एक सूची तैयार करने
के प्रयोजनार्थ एक सीमा आयोग उद्घोषणा द्वारा नियुक्त करेगा। ऐसे जिले
और क्षेत्र अनुसूचित जिले कहलायेंगे।
(2) अनुसूचित जिलों को सामूहिक रूप से पाकिस्तान और शेष ब्रिटिश
भारत को हिन्दुस्तान कहा जायेगा। उत्तर-पश्चिम में पड़ने वाले अनुसूचित
जिलों को पश्चिम पाकिस्तान और उत्तर-पूर्व में पड़ने वाले अनुसूचित जिलों
को पूर्वी पाकिस्तान कहा जायेगा।