436 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
परिशिष्ट 12
भारत के मुस्लिम संप्रदाय द्वारा 1 अक्तूबर, 1906 को शिमला में महामहिम लार्ड मिंटो, भारत के वायसराय और गवर्नर जनरल को प्रस्तुत याचिका ख्1, µ
महामहिम, हमें आपसे मिलने की अनुमति मिलने पर हम अधोहस्ताक्षरी कुलीन पुरुष-जागीदार, तालुकदार, वकील, जमींदार, व्यापारी और भारत के विभिन्न भागों में रहने वाले सम्राट की मुस्लिम प्रजा के अन्य प्रतिनिधि आपसे सादर अनुरोध करते हैं कि हमारी बात पर उचित ध्यान देने की कृपा करेंगे।
विभिन्न जातियों और विभिनन धर्मावलाबियों से युक्त करोड़ों की जनसंख्या वाले
- इस दस्तावेज का भारत के इतिहास में भारी महत्त्व है। यहीं से अंग्रेज सरकार ने भारत के प्रशासन में
मुलमानों की तरफदारी शुरू की और ऐसा कहा जाता है कि यह सब कुछ मुसलमानों को कांग्रेस से
अलग रहने और हिन्दू तथा मुसलमानों की एकता को भंग करने के लिए किया गया था। कांग्रेस-अध्यक्ष
के रूप में स्वर्गीय मौलाना मोहम्मद अली द्वारा अपने भाषण में यह कहने से उनकी बदनामी हुई कि
ब्रिटिश शासन अच्छा है, जिसका अर्थ यह लगाया गया कि इस अभिभाषण की व्यवस्था अंग्रेज सरकार
द्वारा की गई थी। इसी कारण अनेक हिन्दुस्तानी इस याचिका तथा लार्ड मिंटो द्वारा दिए गए इसके उत्तर
का मूल पाठ जानने के इच्छुक थे। मैंने यह याचिका प्राप्त करने के लिए काफी खोजबीन की। मैंने
उस समय विख्यात बुजुर्ग मुसलमान राजनीतिज्ञों से भी इसकी प्रति प्राप्त करने की कोशिश की, परन्तु
यह किसी के पास भी नहीं मिली और न ही उन्हें यह जानकारी थी कि यह कहां मिलेगी। उस समय
के समाचारपत्रों के पास भी याचिका तथा इसके उत्तर का मूल पाठ नहीं था। मैं बड़ा भाग्यशाली रहा
कि मुझे इसकी एक प्रति मेरे मित्र सर राजा अली, एम.एल.ए. (सेंट्रल) के पास मिल गई। उनके पास
लखनऊ से प्रकाशित होने वाले एक दैनिक पत्र ‘इंडियन डेली टेलिग्राफ’ की कटिंग सुरक्षित थी, जो
काफी पहले बंद हो गया था। उसी में यह याचिका तथा इसका उत्तर था।
यह कटिंग देने के लिए मैं श्री राजा अली का आभारी हूं। चूंकि इस दस्तावेज का हिन्दुस्तान में
अंग्रेज शासन के राजनैतिक इतिहास में विशेष महत्व है, इसलिए ‘इंडियन डेली टेलिग्राफ’ के 3 अक्तूबर,
1906 के अंक में उसके शिमला संवाददाता द्वारा प्रकाशित विवरण को यहां उद्धृत करना चाहूंगा।
संवाददाता कहता हैµ
‘मुस्लिम संप्रदाय के वे प्रतिनिधि, जिन्हें महामहिम वायसराय को याचिका प्रस्तुत करनी थी, आज
वाइसरीगल लॉज के बालरूप में प्रातः 11.00 बजे एकत्र हुए। उनकी संख्या 35 थी और उन्हें महामहिम के
आसन के समक्ष अर्धवृत्त में बैठाया गया। ठीक 11 बजे लार्ड मिंटो अपने स्टाफ के साथ कमरे में प्रविष्ट हुए।
उनके सम्मान में सभी लोग खड़े हुए। आगा खान ने महामहिम को स्वयं प्रत्येक सदस्य से परिचित करवाया।
तत्पश्चात् पटियाला के खलीफा ने याचिका प्रस्तुत करने की अनुमति मांगी और फिर आगा खान आगे बढ़े
और महामहिम को संबोधित करके नीचे दी गई याचिका पढ़ी। सभी प्रतिनिधि खड़े रहे।’’
प्रतिनिधिमंडल में निम्नलिखित व्यक्ति शामिल थेµ
महामहिम आगा सर सुलतान मोहम्मद शाह आगा खान, जी.सी.आई.ई. (बंबई)_ शाहजादा बख्तियार
शाह ओ. आई. ई. मैसूर परिवार के प्रमुख, कलकत्ता_ माननीय मलिक हयात खान, सी. आई. ई., लेफिटनेंट
17वां प्रिंस ऑफ वेल्स, तिवाना लांसर्स, तिवाना, शाहपुर (पंजाब)_ माननीय खान बहादुर मियां मोहम्मद
शाह दीन, बॉर-एट-लॉ, लाहौर_ माननीय मौलवी शरीफुदीन, बॉर-एट-लॉ, पटना_ खान बहादुर सैयद नवाब
अली चौधरी, मैमनसिंह, (पूर्वी बंगाल)_ नवाब बहादुर सैयद अमीर हुसैन खान, सी. आई. ई. कलकत्ता_
नसीर हुसैन खान खामल, कलकत्ता_ खान बहादुर मिर्जा शुजात अली बेग_ पर्सियन काउंसिल जनरल,
मुर्शिदाबाद, कलकत्ता (बंगाल)_ सैयद अली इमाम, बॉर, एट. लॉ, पटना (पटना)_ नवाब सरफराज
हुसैन खान, पटना (बिहार)_ खान बहादुर अहमद मोहिउद्दीन खान, स्टाइपेंडरी ऑफ कनार्टक फैमली
(मद्रास)_ मौलवी रफी-उद्दीन अहमद, बॉर-एट-लॉ (बंबई)_ इब्राहमभोय आदम जी परिभोय, जनरल
मर्चेंट (बंबई)_ श्री अब्दुर्रहीम, बॉर-एट-लॉ, कलकत्ता_ सैयद अलाहदाद शाह, स्पेशल मजिस्ट्रेट और