448 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
निर्वाचक निकाय, जैसे अब गठित हैं, द्वारा किसी मुसलमान उम्मीदवार का चुनाव किए जाने की आशा नहीं की जा सकती। और यदि संयोगवश वे ऐसा करते हैं, तो वह उस उम्मीदवार के अपने संप्रदाय के प्रति बहुसंख्यक संप्रदाय का प्रतिनिधि नहीं होगा, और आपने ठीक ही दावा किया है कि आपकी संख्या, आपके संप्रदाय के राजनीतिक महत्व और साम्राज्य की सेवा के कारण, सम्मान के पात्र हैं। मैं आपसे पूर्णतः सहमत हूं, कृपया मुझे गलत न समझा जाए। मैं यह संकेत देने का प्रयास नहीं कर रहा हूं कि संप्रदायों का प्रतिनिधित्व किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है, परन्तु मैं उसी प्रकार भली-भांति संतुष्ट हूं जैसे कि आप होंगे कि भारत में किसी निर्वाचक प्रतिनिधित्व का परिणाम दुर्भाग्यपूर्ण असफलता में होगा, जिसका उद्देश्य इस महाद्वीप के संप्रदायों के मतों और पंरपराओं पर विचार किए बिना वैयक्तिक मताधि कार पर आधारित है। भारतीय लोगों के विराट समूह को प्रातिनिधिक संस्थानों की जानकारी नहीं है। सज्जनों, मैं आपसे सहमत हूं कि स्वशासन की सीढ़ी के आरंभिक पद नगरपालिका और जिला बोर्डों में ढूंढ़ने होंगे और यह उसी दिशा में एक कदम है कि हमें लोगों को धीरे-धीरे राजनीतिक शिक्षा देने पर ध्यान देना चाहिए।
एक आश्वासन
इस बीच मैं केवल यह कह सकता हूं कि मुस्लिम इस बारे में निशि्ंचत रहें कि किसी भी प्रशासनिक पुनर्गठन में, जिससे मैं संबंधित हूं, मुस्लिम संप्रदाय के राजनीतिक अधिकार और हित सुरक्षित रहेंगे। आप और भारत के अन्य लोग ब्रिटिश राज पर विश्वास कर सकते हैं, कि वह महामहिम के भारतीय साम्राज्य की प्रजा की अनेक धार्मिक मतों और परंपराओं का सम्मान करेगा, जैसा कि वह करता रहा है।
सज्जनों, मैं इतने सारे प्रतिष्ठित और प्रतिनिधि मुसलमानों से भेंट करने का अवसर देने के लिए आपके प्रतिनिधिमंडल को हृदय से धन्यवाद देता हूं। मैं आपके जन-कार्यों में आपकी रुचि जो आपको इतनी दूरी तय करके यहां लाई है, की सराहना करता हूं और केवल इस बात पर खेद व्यक्त करता हूं कि आपका शिमला-दौरा बहुत कम अवधि का रहा।