4. एकता का विघटन - Page 64

रक्षा-व्यवस्था में कमजोरी

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ये सकल आंकड़े हैं। इनमें कुछ कमी-बेशी हो सकती है। केंद्रीय सरकार ने रेलों, मुद्रा और डाक-तार से जो राजस्व प्राप्त किया, उसे इसमें नहीं जोड़ा गया है_ क्योंकि यह पता लगाना संभव नहीं कि हर प्रांत से कितना राजस्व इकट्टòा किया गया। जब यह पता चल जाएगा तो राजस्व के आंकड़ों में कुछ जोड़ना पड़ेगा। इस बारे में कोई संदेह नहीं कि राजस्व की इन मदों का जो हिस्सा हिंदुस्तान को मिलेगा, वह पाकिस्तान को मिलने वाले हिस्से से कहीं अधिक होगा। जैसे इन आंकड़ों में कुछ जोड़ना पड़ेगा, वैसे ही कुछ घटाना भी पड़ेगा। तथापि इनमें से अधिकांश पाकिस्तान के हिस्से में से घटाए जाएंगे, क्योंकि पंजाब का कुछ भाग पश्चिमी पाकिस्तान के हिस्से में से निकालना पड़ेगा। इसी तरह बंगाल का कुछ भाग प्रस्तावित पूर्वी पाकिस्तान के हिस्से से घटाया जाएगा, यद्यपि आसाम का एक जिला उसमें जोड़ना होगा। मेरे हिसाब से बंगाल से 15 जिले ओर पंजाब से 13 जिले अलग करने पड़ेंगे। पर्याप्त आंकड़ों के अभाव में इस बारे में कोई भी ठीक-ठीक नहीं बता सकता कि इन जिलों को निकालने से क्षेत्रफल, जनसंख्या और राजस्व के आंकड़ों में कितनी कमी आ जाएगी। तथापि बहुत मोटा अंदाज लगाया जा सकता है कि जहां तक पंजाब और बंगाल का सवाल है, उनका राजस्व आधा हो जाएगा। पाकिस्तान जो खोएगा, स्वभावतः वह हिंदुस्तान को मिलेगा। अगर इसे निश्चित रूप से बताना हो तो पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान का राजस्व 60 करोड़ रुपए में से 24 करोड़ रुपए कम हो जाएगा, अर्थात् 36 करोड़ रुपए, जबकि हिंदुस्तान का राजस्व 96 करोड़ जमा 24 करोड़, अर्थात् लगभग 120 करोड़ रुपए हो जाएगा।

मेरी टिप्पणियों के संदर्भ में इन आंकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि हिंदुस्तान के संसाधन पाकिस्तान के संसाधनों के मुकाबले कहीं अधिक हैं, चाहे क्षेत्रफल हो, राजस्व हो या जनसंख्या। इसलिए संसाधनों की दृष्टि से तो आशंका की कोई बात नहीं, क्योंकि पाकिस्तान बनने से हिंदुस्तान कमजोर स्थिति में नहीं आ जाएगा।

III

सशस्त्र सेनाओं का प्रश्न

किसी देश की रक्षा उसकी प्रकृति सीमाओं पर इतना निर्भर नहीं करती, जितना उसके संसाधनों पर। परंतु संसाधनों से भी कहीं अधिक यह निर्भर करती है, उसके पास उपलब्ध लड़ाकू सेनाओं पर।

पाकिस्तान और हिंदुस्तान के पास कितनी लड़ाकू सेनाएं उपलब्ध हैं?