5. रक्षा व्यवस्था में कमजोरी - Page 67

58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

नहीं। जैसा कि नीचे दिए गए विचारों से पता चलता है, ऐसा निष्कर्ष पूर्णतः भ्रामक है।

पहली बात तो यह है कि साइमन कमीशन जिस बात को भारत के लिए विशिष्ट समझता है, वह राजस्व में इतनी विशिष्ट है नहीं। जो बात विशिष्ट लगती है, वह लोगों के किसी आंतरिक दोष के कारण नहीं है। गत वर्षों में अंग्रेज सरकार की भर्ती नीति के कारण यह विशिष्टता पैदा हुई है। हिंदुस्तानी फौज में उत्तर-पश्चिम के लोगों की प्रमुखता का कारण सरकारी तौर पर यह बताया गया कि वे बहादुर (मार्शल) होते हैं। श्री चौधरी ख्1, ने अपने अकाट्य तथ्यों के आधार पर यह सिद्ध कर दिया है कि यह व्याख्या सच्चाई से कोसों दूर है। उन्होंने यह दिखाया है कि फौज में उत्तर-पश्चिम के लोगों की प्रमुखता 1857 के गदर के दिनों से ही हो गई थी, अर्थात् 1879 में स्पेशल आर्मी कमेटी द्वारा, जो उसी वर्ष नियुक्त हुई थी, पहली बार मार्शल और गैर-मार्शल जातियों के सिद्धांत को अस्पष्ट रूप से प्रतिपादित किए जाने से बीस वर्ष पहले ख्2,, और उनकी प्रमुखता का कारण इन जातियों की लड़ाई लड़ने की क्षमता नहीं, बल्कि यह था कि उन्होंने गदर को दबाने में अंग्रेजों की पूरी मदद की थी जिसमें बंगाल आर्मी पूरी तरह शामिल हो गई थी। श्री चौधरी के शब्दों मेंः

फ्गदर-पूर्व बंगाल की फौज गंगा बेसिन की ब्राह्मण और क्षत्रिय फौज थी।

जैसा कि इस लेख के पहले भाग में हमने बताया है, उन दिनों की तीनों

प्रेसिडेंसी फौजें अपने क्षेत्रों की सैनिक क्षमताओं का पूरी तरह प्रतिनिधित्व

करती थीं, तथापि उन्हें किसी भी तरह संबद्ध प्रांतों की राष्ट्रीय सेना की

संज्ञा नहीं दी जा सकती क्योंकि उन दिनों ऐसी कोई चेष्टा नहीं की गई

थी कि जनता की परंपरागत युद्धजीवी जातियों के अतिरिक्त भी फौज में

भरती की जाए। परंतु वे सब संभावित क्षेत्रों से अपने सैनिक भरती करते

थे, जैसे मद्रास आर्मी तमिल और तेलगु क्षेत्रों से भरती की जाती थी, बंबई

आर्मी पश्चिम भारत से, बंगाल आर्मी बिहार और संयुक्त प्रांत से और बहुत

सीमित संख्या में बंगाल से। किसी कबीले या जाति या क्षेत्र से भरती करने

पर कोई सरकारी पाबंदी नहीं थी, बशर्ते वे भरती के पात्र हों। कुछ देर के

लिए बंबई और मद्रास की फौज को छोड़ दें, तो इस नियम का एकमात्र

  1. देखिए, ‘द मार्शल रेसिज ऑफ इंडिया’, शीर्षक से मॉडर्न रिव्यू के जुलाई 1930, सितम्बर 1930, जनवरी

1931, और फरवरी 1931 के अंकों में प्रकाशित लेख।

  1. कमेटी ने जो प्रश्नावली जारी की थी, उसमें यह प्रश्न भी शामिल था - यदि ब्रिटिश साम्राज्य की

सुरक्षा के लिए एक कुशल और उपलब्ध भारतीय फौज के रिजर्व को आवश्यक समझा जाए तो क्या

उसे देश के उन भागों से भरती नहीं किया जाना चाहिए जहां से हमें सर्वोत्तम फौजी मिलते हैं, बजाय

इसके कि यह देश की निर्बलतम और सबसे कम युद्धजीवी जातियों से भर्ती किए जाएं?