5. रक्षा व्यवस्था में कमजोरी - Page 68

रक्षा-व्यवस्था में कमजोरी

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अपवाद बंगाल फौज में था जो पंजाबियों और सिखों पर लागू होता था, जिन्हें उनकी शानदार सैनिक परंपरा के बावजूद उत्तरी भारत की सेना में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला था। इसके विपरीत एक सरकारी आदेश द्वारा उनकी भरती पर कड़े प्रतिबंध लगे हुए थे। आदेश के अनुसार एक रेजीमेंट में पंजाबियों की संख्या दो सौ से अधिक नहीं होनी चाहिए, उनमें से एक सौ से ज्यादा सिख नहीं होने चाहिए। यह तो बंगाल आर्मी की हिंदुस्तानी रेजीमेंट के विद्रोह के कारण ही पंजाबियों को अंग्रेज अधिकारियों की आंखों में आने का मौका मिला। उस समय तक वे संदेह के पात्र थे और प्रतिबंध के शिकार थे। और गदर से पहले बंगाल आर्मी ने मुख्यतः अवध, उत्तर और दक्षिण बिहार - विशेषकर दक्षिण बिहार के धनबाद और भोजपुर - गंगा और जमुना के दोआब और रूहेलखंड से भरती की जाती थी। इन क्षेत्रों से भरती किए जाने वाले सैनिक मुख्यतः ऊंची जातियों के लोग होते थे, अर्थात् सभी वर्णों के ब्राह्मण, क्षत्रिय, राजपूत और अहीर। एक रेजिमेंट में जिस औसत अनुपात में इन वर्गों के लोग भरती किए जाते थे, वह इस प्रकार था - 1. ब्राह्मण 7/24, 2. राजपूत 1/4, 3. नीची जातियों के हिंदू 1/6, 4. मुसलमान 1/6, 5. पंजाबी 1/8 ।

फ्इस फौज में आजकल जिस क्षेत्र से सबसे अधिक फौजी भरती किए जाते हैं वे हैं - पंजाब, नेपाल, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत, कुमायूं और गढ़वाल के पहाड़ी इलाके। राजपूताना से या तो रंगरूट लिए ही नहीं जाते थे या बहुत ही कम लिए जाते थे। वस्तुतः भारत की सभी प्रसिद्ध लड़ाकू जातियों को फौज से बाहर रखा जाता था, जैसे सिख, गुरखा, पंजाबी, मुसलमान, डोगरा, जाट, पठान, गढ़वाली, राजपूताना, राजपूत, कुमाउंनी, गूजर - ऐसे लोग जिन्हें आज हिंदुस्तानी फौज का मजबूत स्तंभ समझा जाता है। एक ही वर्ष में और एक ही विद्रोह से यह सब कुछ बदल गया। 1857 में शुरू हुए गदर ने पुरानी बंगाल फौज को उड़ा दिया तथा उसकी जगह पंजाबी और अन्य बर्बर लोगों ने ले ली। आज मोटे तौर पर हिंदुस्तान की फौज की रचना इसी अनुपात में है।

फ्हिंदुस्तानी रेजीमेंटों में बंगाल की फौज के विद्रोह के फलस्वरूप जो जगह खाली हुई, उसे तुरंत ही सिखों और अन्य पंजाबियों तथा पहाड़ी लोगों से भर दिया गया जो बदला लेने और हिंदुस्तान के शहरों को लूटने के लिए बेहद उत्सुक थे। अंग्रेजों ने उन सब पर हिंदुस्तानी फौजियों की मदद से विजय पाई थी और उन्हें अपने अधीन किया था, और उन्होंने