5. रक्षा व्यवस्था में कमजोरी - Page 76

रक्षा-व्यवस्था में कमजोरी

67

  1. हिंदुस्तानी मुसलमान 4.1 3.42 4.45 शून्य

  2. ब्राह्मण 1.8 1.86 2.5 शून्य IV दक्षिण भारत 16 11.9 12 5.5

  3. मराठा 4.9 3.85 3.7 5.33

  4. मद्रासी मुसलमान 3.5 2.71 2.13 शून्य

  5. तमिल 2.5 2.0 1.67 शून्य V बर्मा

  6. बर्मी शून्य नगण्य 1.7 3.0

इस सारणी से यह साफ पता चल जाता है कि विशेषकर 1919 के बाद हिंदुस्तान फौज की सांप्रदायिक संरचना में जो उल्लेखनीय परिवर्तन होते रहे हैं वे हैं 1. पंजाबी मुसलमानों और पठानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि, 2. सिखों का स्थान घटकर पहले से तीसरा हो जाना, 3. राजपूतों का घटकर चौथे स्थान पर आना, और 4. संयुक्त प्रांत के ब्राह्मणों, मद्रासी मुसलमानों और तमिलों (ब्राह्मण और गैरब्राह्मण, दोनों) को फौज में भरती न किया जाना।

1930 के आंकड़ों का और अधिक विश्लेषण करने से हिंदुस्तानी पैदल सेना और घुड़सवार सेना की सांप्रदायिक संरचना पर श्री चौधरी ने निम्नांकित सारणीऽ में और अधिक प्रकाश डाला हैः

ऽ इस सारणी में भारतीय पैदल सेना (82 सक्रिय और 18 ट्रेनिंग बटालियनों), भारतीय घुड़सवार सेना या

रेजीमेंट और गुरखा पैदल सेना की 20 बटालियनों में हर हिंदुस्तानी पात्र वर्ग का प्रतिशत दिखाया गया है।

इस सारणी में (क) पहाड़ी तोपखाने की 19 बटालियनों, (ख) सफरमैना और सुरंगें साफ करने वालों

की तीन रेजीमेंटों, (ग) इंडियन सिग्नल कोर, और (घ) दी कोर ऑफ इंडियन पायोनियर्स के हिंदुस्तानी

कार्मिक शामिल नहीं हैं। इन सभी में पंजाबी मुसलमान, सिख, पठान, हिंदुस्तानी हिंदू और मुसलमान,

सभी वर्गों के मद्रासी और हजारों अफगान क्लास टुकडि़यों या क्लास कंपनियों में भिन्न-भिन्न अनुपातों

में शामिल हैं। सेना के इन अंगों की कुछ टुकडि़यां मद्रासी और हज़रा लोगों की बनी हुई हैं और अब

उन्हें हिंदुस्तानी फौज की दूसरी टुकडि़यों में शामिल कर लिया गया है, परंतु इससे हिंदुस्तानी फौज की

वर्गवार रचना में कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता। इस सारणी में ब्रिटिश पैदल सेना और तोपखाना टुकडि़यों

से जुड़े हुए हिंदुस्तानी कार्मिक भी शामिल नहीं हैं।