5. रक्षा व्यवस्था में कमजोरी - Page 75

66 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

यह इतनी महत्वपूर्ण है कि कमीशन ने बाकी जिन तीन विशिष्टताओं की चर्चा की है, वे महत्व और सामाजिक-राजनीतिक परिणामों की दृष्टि से इसके सामने फीकी पड़ जाती हैं।

यदि इस विशिष्टता का व्यापक रूप से पता चल जाए तो अनेक लोग गम्भीर रूप से सोचने लगेंगे। इससे निश्चित रूप से ऐसे सवाल पैदा होंगे जिनका जवाब नहीं दिया जा सकता और उससे हिंदुस्तान की राजनीतिक प्रगति का रास्ता आसानी से बंद हो जाएगा। ये प्रश्न महत्व और जटिलता की दृष्टि से फौज के भारतीयकरण से संबद्ध प्रश्नों से भी कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।

यह उपेक्षित विशिष्टता है हिंदुस्तानी फौज की सांप्रदायिक संरचना। श्री चौधरी ने अपने लेखों में इस बारे में प्रासंगिक आंकड़े एकत्रित किए हैं जो हिंदुस्तानी फौज के इस पहलू पर पर्याप्त रोशनी डालते हैं। नीचे दी गई सारणी में हिंदुस्तानी फौजों का क्षेत्रवार और संप्रदायवार आनुपातिक ब्यौरा दिया गया हैः

हिंदुस्तानी फौज की संप्रदायवार संरचना में परिवर्तन

क्षेत्र और संप्रदाय 1914 में 1918 में 1919 में 1930 में

प्रतिशत प्रतिशत प्रतिशत प्रतिशत I पंजाब, उत्तर-पश्चिम

सीमा प्रांत और कश्मीर 47 46.5 46 58.5

  1. सिख 19.2 17.4 15.4 13.58
  2. पंजाबी मुसलमान 11.1 11.3 12.4 22.6
  3. पठान 6.2 5.42 4.54 6.35 II नेपाल, कुमाऊं और

गढ़वाल 15 18.9 14.9 22.0

  1. गुरखा 13.1 16.6 12.2 16.4 III उत्तरी भारत

(अपर इंडिया) 22 22.7 25.5 11.0

  1. संयुक्त प्रांत के राजपूत 6.4 6.8 7.7 2.55