5. रक्षा व्यवस्था में कमजोरी - Page 78

रक्षा-व्यवस्था में कमजोरी

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यदि इन आंकड़ों को विभिन्न संप्रदायों में बांटा जाए तो 1930 में उनका

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60-55
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35-79
3-66
50-554
16-4
29-974
3-072
61-92
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30-08
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इन आंकड़ों से हिंदुस्तानी फौज की सांप्रदायिक संरचना का पता चलता है। श्री चौधरी के अनुसार, भारतीय पैदल सेना में 36 प्रतिशत मुसलमान थे और भारतीय तोपखाने में 30 प्रतिशत। ये आंकड़े 1930 के हैं। अब हमें देखना चाहिए कि उसके बाद से इस अनुपात में क्या परिवर्तन आया है।

हिंदुस्तान के फौजी इतिहास की एक अत्यंत विस्मयजनक बात यह है कि 1930 के बाद से इस बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह जानना असंभव है कि इस समय सेना में मुसलमान का अनुपात क्या है। ऐसा कोई सरकारी प्रकाशन नहीं है जिससे यह जानकारी उपलब्ध हो सके। इससे पहले ऐसे प्रकाशनों की कोई कमी नहीं थी जिनसे यह जानकारी मिलती थी। यह भी बड़े आश्चर्य की बात है कि ये सब अब विलुप्त हो गए हैं, और यदि वे मिलते भी हैं तो उनमें यह जानकारी नहीं होती। न केवल इस मुद्दे पर जानकारी देने वाला कोई सरकारी प्रकाशन उपलब्ध नहीं है, परंतु जब केंद्रीय विधान सभा में सदस्यों ने इस विषय पर प्रश्न पूछे तो सरकार ने कोई जानकारी देने से इंकार कर दिया। केंद्रीय विधान सभा की कार्रवाइयों से लिए गए इन प्रश्नोत्तरों से स्पष्ट होता है कि इस मुद्दे पर जानकारी हासिल करने के हर प्रयास का सरकार कितना जोरदार विरोध करती है।

15 सितम्बर, 1938 को निम्नलिखित प्रश्न पूछे गए और उनके जो उत्तर मिले, वे नीचे दिए गए हैंः

हिंदुस्तान के लिए रक्षा की व्यवस्थाऽ

प्रश्न 1360ः श्री बद्रीदत्त पांडे (श्री अमरेंद्रनाथ चट्टठ्ठोपाध्याय की ओर से)

ऽ केंद्रीय विधान सभा वाद-विवाद, 1938 खंड VI पृ. 2462