5. रक्षा व्यवस्था में कमजोरी - Page 96

रक्षा-व्यवस्था में कमजोरी

केंद्रीय राजकोष में योगदान प्रांत रुपयों में पंजाब 1,18,01,385 उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत 9,28,294 सिंध 5,86,46,915 बलूचिस्तान कुछ नहीं। योग 7,13,76,594 इसके मुकाबले हिंदुस्तान के प्रांत निम्नलिखित रूप में योगदान देते हैंः

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प्रांत रुपयों में

मद्रास 9,53,26,745

बंबई 22,53,44,247

बंगालऽ 12,00,00,000

संयुक्त प्रांत 4,05,53,000

बिहार 1,54,37,742

मध्य प्रांत और बरार 31,42,682

आसाम 1,87,55,967

उड़ीसा 5,67,346

योग 51,91,27,729

यह देखा जा सकता है कि पाकिस्तान-प्रांतों का योगदान बहुत कम होता है। अधिकांश योगदान हिंदुस्तान के प्रांतों से आता है। वास्तव में तो हिंदुस्तान के प्रांतों से मिले योगदान के कारण ही हिंदुस्तान की सरकार पाकिस्तान के प्रांतों में अपनी गतिविधियां चला सकती है। पाकिस्तान के प्रांत हिंदुस्तान के प्रांतों से एक निकासी नाले की तरह जुड़े हुए हैं। वे न केवल केंद्रीय सरकार को बहुत कम योगदान देते हैं, बल्कि केंद्रीय सरकार से बहुत अधिक हासिल करते हैं। केंद्रीय सरकार का कुल राजस्व 121 करोड़ रुपए होता है। इसमें से लगभग 52 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष फौज पर खर्च किए जाते हैं। फौज पर ये जो 52 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं, उसका अधिकांश पाकिस्तान-क्षेत्र की मुस्लिम फौज पर खर्च किय जाता है। अब इस 52 करोड़ रुपए में से अधिकांश हिंदू प्रांतों से मिलता है और वह एक ऐसी फौज पर

खर्चा जाता है जिसमें अधिकांश गैर-हिंदू हैं। इस खेदजनक स्थिति को कितने हिंदू जानते हैं? कितने लोग जानते हैं कि यह खेदजनक स्थिति किसकी कीमत पर बनाई जा रही है? आज हिंदू इसके लिए इसलिए जिम्मेदार नहीं हैं कि वे इसे रोक नहीं सकते। प्रश्न यह है कि क्या वे इस खेदजनक स्थिति को चलते रहने देंगे? यदि वे इसे रोकना चाहते हैं तो इसका सबसे निश्चित तरीका यह है कि पाकिस्तान की योजना को प्रभावी होने दिया जाए। इसका विरोध करना अपने विनाश के लिए स्वयं सहायक हथियार खरीदना है। सुरक्षित सीमा से सुरक्षित फौज बेहतर होती है।

ऽ केवल आधा राजस्व दिखाया गया है, क्योंकि लगभग आधी जनसंख्या हिंदू है।