86 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
सीमाओं में रहते हुए भारत अपनी फौज का इस्तेमाल मुस्लिम देशों के विरुद्ध करने को स्वतंत्र नहीं होगा, चाहे फौज में मुसलमानों का वर्चस्व न भी रहे, और उसे अपनी सीमाओं के मुस्लिम देशों के साथ अधीनस्थ के रूप में सहयोग करना पड़ेगा, जैसा कि हिंदुस्तानी रियासतें सर्वोपरि ब्रिटिश सत्ता से करती हैं।
हिंदुओं को एक कठिन विकल्प अपनाना है - सुरक्षित सेना हो या सुरक्षित सीमा। इस कठिनाई में हिंदुओं के सामने सबसे बुद्धिमत्तापूर्ण तरीका क्या होगा? क्या उनका हित इस बात पर जोर देने में है कि मुस्लिम हिंदुस्तान हिंदुस्तान का एक भाग बना रहे, ताकि उसे एक सुरक्षित सीमा मिल सके। इस क्षेत्र के मुसलमान हिंदुओं के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया रखते हैं, इस बारे में कोई संदेह नहीं किया जा सकता। तो फिर हिंदुओं के लिए बेहतर क्या है? मुसलमानों के बिना और उन्हें अपना विरोधी बनाकर रखा जाए या मुसलमानों को साथ रखकर उन्हें अपना विरोधी बनाकर रखा जाए? यदि यह प्रश्न किसी दुनियादार विवेकवान पुरुष से पूछा जाए तो वह इसका केवल एक ही उत्तर देगा - यदि मुसलमानों को विरोधी बनाकर रखना ही है तो अच्छा यही होगा कि मुसलमानों के बिना उनका विरोधी बनकर रहा जाए, न कि उन्हें साथ रखकर। यह एक पुख्ता चाह है कि मुसलमानों के बिना रहा जाए। हिंदुस्तानी फौज को मुसलमानों की बहुलता से छुटकारा पाने का यही तरीका है।
ऐसा किस तरीके से किया जा सकता है? इसका एक ही तरीका है, और वह यह कि पाकिस्तान की योजना का समर्थन किया जाए। एक बार जब पाकिस्तान बन जाएगा तो हिंदुस्तान के पास जन और धन के रूप में पर्याप्त संसाधन होने के कारण वह एक ऐसी फौज रख सकेगा जिसे वह अपना कह सके और उसे यह हुक्म देने वाला कोई नहीं होगा कि उसका इस्तेमाल कैसे किया जाए और किसके विरुद्ध किया जाए। इस तरह, पाकिस्तान बनने से हिंदुस्तान की रक्षा कमजोर होने की जगह निश्चित रूप से सुधर जाएगी।
ऐसा लगता है कि हिंदुओं ने इस बात को अच्छी तरह समझा नहीं है कि फौज से अलग रखे जाने के कारण अपनी रक्षा के दृष्टिकोण से वे कितनी हानिकारक स्थिति में हैं, और इस बात को वे और भी कम जानते हैं, जो यद्यपि विचित्र लगता है, कि अपने लिए यह हानिकारक स्थिति खरीदने की वे भारी कीमत अदा कर रहे हैं।
वर्तमान हिंदुस्तानी फौज का मुख्य भर्ती-क्षेत्र, अर्थात् पाकिस्तान क्षेत्र, केंद्रीय राजकोष में बहुत कम योगदान देता है, जैसा कि नीचे दिए गए आंकड़ों से पता चलता हैः