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तुच्छ चालें

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मांगों पर शासन ने गुणावगुण पर विचार कर आपसी मतभेदों को दूर करने का भरसक प्रयत्न किया है।

आप चाहते हैं कि यह पत्र-व्यवहार जिसमें 11 मार्च को सर सैमुअल होर को लिखा गया आपका पत्र भी शामिल है, प्रकाशित किया जाए। मुझे यह अनुचित प्रतीत होता है। यदि आपकी नजरबंदी के कारण आप जनता के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं और इसीलिए आपने अनशन का इरादा किया है तो मैं आपके अनुरोध पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार हूं, बशर्ते कि आप पुनर्विचार के बाद ऐसा न करें। मैं पुनः जोर देकर कहना चाहता हूं कि आप शासन के निर्णय पर फिर से विचार करें और गंभीरता से सोचें कि आपने अनशन करने का जो निर्णय लिया है, वह कहां तक उचित है?

आपका विश्वासपात्र

जे रैम्जे मेक्डोनाल्डय्

यह मालूम होने पर कि प्रधानमंत्री बात मानने वाले नहीं हैं, गांधी जी ने आमरण अनशन की धमकी पर अटल रहने की सूचना देते हुए निम्नलिखित पत्र भेजा -

फ्यरवदा सेंट्रल जेल,

सितंबर 9, 1932

प्रिय मित्र,

फ्तार के माध्यम से भेजा हुआ आपका पत्र मुझे आज मिला। इसके लिए धन्यवाद। मुझे खेद है कि आमरण अनशन करने के मेरे विचार की आपने जो व्याख्या की है, वह मेरे दिमाग में कभी नहीं आई। मैंने उस विशेष वर्ग (दलित वर्ग) के लिए बोलने की मांग की है, जिनके हितों का बलिदान करने का दोषी आपने मुझे ठहराया है। मैंने इसीलिए आमरण अनशन करने का निश्चय किया है। मुझे आशा थी कि मेरा यह निर्णय ही आपको ऐसी स्वार्थपूर्ण व्याख्या करने से अवश्य रोकेगा। बिना किसी तर्क-वितर्क के मैं यह कह सकता हूं कि मेरा यह कार्य मेरा धर्म है। दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था करना हिंदू धर्म को बरबाद करने का प्रयास करना है और इससे दलित वर्गों को कोई लाभ नहीं होगा। मैं यह कहना चाहूंगा कि