अध्यायः 4
घृणित समर्पण
कांग्रेस का निंदनीय पलायन
I
पूना पैक्ट पर दिनांक 24 सितंबर, 1932 को हस्ताक्षर हुए थे। 25 सितंबर, 1932 को अपना समर्थन देने के लिए बम्बई में हिंदुओं की एक सभा हुई। उस सभा में निम्नांकित प्रस्ताव पास किए गए µ
फ्यह सम्मेलन दिनांक 25 सितंबर, 1932 को सवर्ण हिंदुओं और दलित वर्गों के नेताओं में हुए पुना पैक्ट की पुष्टि करता है और विश्वास व्यक्त करता है कि अब ब्रिटिश सरकार हिंदुओं में पृथक मतदान प्रणाली के फैसले को वापस ले लेगी और इस समझौते को संपूर्ण रूप में स्वीकार कर लेगी। यह सम्मेलन सरकार से यह भी अनुरोध करता है कि सरकार इस पर तुरंत कार्यवाही करे, ताकि महात्मा गांधी इन्हीं शर्तों के अंतर्गत तुरंत अपना अनशन तोड़ दें, जिसमें पहले ही काफी विलम्ब हो गया है। यह सम्मेलन सभी संबंधित संप्रदायों के नेताओं से अपील करता है कि वे समझौते के प्रभावों को समझें और इस प्रस्ताव में रखी गई शर्तों को पूरा करने का भरसक प्रयत्न करें।
यह सम्मेलन संकल्प करता है कि आज से हिंदुओं में कोई भी मनुष्य जन्म से अस्पृश्य नहीं समझा जाएगा और जो आज तक अस्पृश्य समझे गए हैं, सार्वजनिक कुओं से पानी भरने, सार्वजनिक स्कूलों में पढ़ने, सार्वजनिक मांगों पर चलने और अन्य सार्वजनिक संस्थाओं का उपयोग करने में अन्य हिंदुओं के साथ समान रूप से अधिकृत होंगे। इन अधिकारों को सबसे पहले कानूनसम्मत मान्यता दी जाएगी और यदि समय से पहले इसे वैसी मान्यता नहीं मिल पाती तो स्वराज संसद के अधिनियमों में यह सबसे पहला अधिनियम होगा।