110 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस बात पर भी सहमति प्रकट की जाती है कि यह हिंदू नेताओं का
कर्तव्य होगा कि वे तथाकथित अस्पृश्य वर्गों पर रूढि़यों के तौर पर चली
आ रही सामाजिक पाबंदियों, जिनमें मन्दिर प्रवेश पर लगी पाबंदी भी शामिल
है, को दूर करने के लिए मुनासिब और शांतिमय तरीके से यथाशीघ्र प्रयत्न
करेंगे।य्
इस प्रस्ताव के पश्चात् हिंदुओं ने जोशोखरोश से अस्पृश्यों के लिए मंदिरों के द्वार खोल दिए। कोई भी ऐसा सप्ताह खाली नहीं जाता था, जिसमें श्री गांधी द्वारा प्रकाशित फ्हरिजनय् साप्ताहिक के प्रमुख पृष्ठ पर फ्वीक टू वीकय् स्तंभ में अस्पृश्यों के लिए खोले गए मंदिरों की लंबी सूची न निकलती हो। उनके लिए कुएं खुलने, पाठशालाएं खुलने की खबरें भी प्रकाशित होतीं। मैं फ्हरिजनय् के दो अंकों से फ्वीक टू वीकय् स्तम्भ प्रस्तुत कर रहा हूंः
फ्हरिजनय् 18 फरवरी, 1933
वीक टू वीक
(7 फरवरी, 1933 को समाप्त होने वाले सप्ताह में) मंदिर खोले गए
उत्तरी कलकत्ता में डेढ लाख रुपए की लागत से हाल ही में बना मंदिर।
मद्रास के गंजम जिले में भापुर गांव का एक मंदिर।
पंजाब में जालंधर नौरानिया का एक ठाकुरद्वार मंदिर।
कुएं खोले गए
उड़ीसा के जिला कटक में जयपुर कस्बा में गुरियापुर का नगरपालिका कुआं। संयुक्त प्रांत के आगरा में वजीरपुरा और नीक्की गली में दो कुएं।
त्रिचिनापल्ली (मद्रास) में एक रूढि़वादी हिंदू ने हरिजनों और सवर्ण हिंदुओं के लिए सांझा कुआं खुदवाने पर खर्च करने की पेशकश।
स्कूल शुरू किए गए
सं.प्रां. के मेरठ जिले के बछरौटा में एक निःशुल्क स्कूल।
राजपूताना के मेताह जिले में एक स्कूल।
राजपूताना के जयपुर रियासत में फतहपुर, चेमन और अभयपुर में तीन स्कूल।