136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री बिड़ला और ठक्कर ने 3 नवंबर, 1932 को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की जिसमें उन्होंने उस संस्था का कार्यक्रम बनाया और यह भी बताया कि संस्था उस कार्यक्रम को कैसे कार्यान्वित करेगी।
कार्यक्रम के बारे में विज्ञप्ति में कहा गयाः
फ्संस्था का विश्वास है कि सनातनी हिंदुओं में सूझबूझ वाले लोग अस्पृश्यता
निवारण के उतना विरुद्ध नहीं है, जितना कि अंतर्जातीय भोज और अंतर्जातीय
विवाह के। चूंकि संस्था की यह आकांक्षा नहीं है कि अपनी सीमा से बाहर
के सुधारों को हाथ में ले, यह स्पष्ट कर देना उचित होगा कि संस्था सवर्ण
हिंदुओं में अस्पृश्यता के चिह्नों को समझा-बुझाकर समाप्त करने का कार्य
करेगी, उसका मुख्य कार्य रचनात्मक होगा_ जैसे शैक्षिक, आर्थिक, सामाजिक
क्षेत्र में दलित वर्गों का उत्थान, जिससे अस्पृश्यता निवारण को बहुत बल
मिलेगा। ऐसे कार्य से कट्टठ्ठरपंथी सनातनी हिंदू भी विरोध करने के बजाए
सहानुभूति दिखाएंगे और मुख्यतया इस संस्था का निर्माण इसीलिए किया गया
है। सामाजिक सुधार जैसे जाति व्यवस्था को समाप्त करना और अंतर्जातीय
सहभोज इस संस्था की परिधि से बाहर रखे गए हैं।य्
योजना को सहजता से चलाने के लिए यह प्रस्ताव रखा गया कि प्रत्येक प्रांत इकाइयों में विभाजित कर दिया जाए और प्रत्येक इकाई का वेतनभोगी उसका प्रभारी हो। जरूरी नहीं कि एक जिले में एक इकाई हो, वह इकाई दो जिलों अथवा दो राज्यों को भी मिलाकर बनाई जा सकती है। एक वर्ष के लिए एक साधारण बजट का मसविदा भी बनाया गया। वह बजट निम्न प्रकार होगा µ
फ्पूरे खर्च का कम से कम दो तिहाई धन उनके वास्तविक कल्याण कार्यों
पर व्यय होना चाहिए और शेष एक तिहाई धन कर्मचारियों और उनके भत्तों
पर व्यय होना चाहिए। इसके लिए न्यूनतम दो वेतनभोगी कार्यकर्ता होंगे, उन्हें
महीने में 15 से 29 दिन तक गांवों में भ्रमण करना होगा।
दो भ्रमणशील कार्यकर्ताओं का रखरखाव एवं भत्ता µ
30$20=50 × 12 = 600
दो भ्रमणशील कार्यकर्ताओं का यात्रा भत्ता - 2 × 10 × 12 = 240
कार्यकर्ताओं का विविध खर्च - 2 × 10 × 12 = 240
कल्याणकार्य अर्थात्, स्कूली पुस्तकों का मूल्य, = 2000
छात्रवृत्ति, पुरस्कार, कुओं के लिए अनुदान और
और हरिजन पंचायतों का निर्माण योग 3080