144 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
दुर्भाग्यवश अल्प सूचना पर लंदन के लिए रवाना होने के कारण मुझे वह अवसर गंवाना पड़ रहा है। तथापि मैं दूसरा सर्वोत्तम विकल्प लिखित रूप में अपने विचार से भेज रहा हूं। इस अनुरोध के साथ कि आप इन विचारों को केंद्रीय बोर्ड के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत करेंगे।
मेरे विचार से दलित वर्गों के उत्थान के लिए दो विभिन्न पद्धतियां हो सकती हैं। एक वर्ग ऐसा है जो यह सोचता है कि दलित वर्ग के सदस्यों की स्थिति उनके व्यक्तिगत आचरण पर निर्भर करती है। यदि वे कंगाली और मुसीबतों में फंसे हैं, तो इसका कारण यही है कि वे स्वयं ही दुष्ट और पापी हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का यह वर्ग, योजना को हाथ में लेते हुए, उन सभी प्रयत्नों और साधनों पर अपना ध्यान केंद्रित करता है जो इस योजना की सफलता में आवश्यक है_ जैसे इसमें संयम, व्यायाम, सहयोग, पुस्तकालय, पाठशालाएं इत्यादि शामिल की जा सकती हैं, जो किसी व्यक्ति के उत्थान के लिए आवश्यक है। मेरे विचार से इस समस्या से निपटने का एक और भी तरीका है। वह तरीका इस भावना से पैदा होता है कि कोई मनुष्य जिस प्रकार की परिस्थितियों और वातावरण में रहता है, उसी पर उसका भाग्य निर्भर करता है। यदि कोई मनुष्य गरीबी और मुसीबत से सदैव पीडि़त रहता है, तो उसका कारण यही है कि वातावरण उसके लिए अनुकूल और हितकर नहीं है। मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं कि दूसरा विचार अधिक सही है, पहला विचार कुछ लोगों का स्तर उठाने में सहायक हो सकता है, परंतु पूरा वर्ग इससे ऊंचा नहीं उठ सकता। एंटी अनटचेबिलिटी लीग के उद्देश्य के संबंध में मेरा विचार यह है कि इससे दलित वर्ग के केवल कुछ ही चुने हुए बच्चों को उन्नति करने में सहायता न मिले बल्कि पूरे वर्ग का स्तर उठाने में वह विचार सहायक सिद्ध हो। अतः मैं नहीं चाहता कि लीग केवल स्वयं की योजना को कार्यान्वित करने में अपनी शक्ति व्यर्थ में बरबाद करे। मैं चाहूंगा कि बोर्ड अपनी सारी शक्तियों को ऐसी योजना पर केंद्रित करे, जिससे दलित वर्ग के लोगों को स्वच्छ सामाजिक वातावरण मिल सके। अपने विचारों को सामान्य ढंग से रखते हुए लीग की योजना के लिए मैं कुछ ठोस प्रस्ताव पेश करता हूं µ
1. नागरिक अधिकारों को प्राप्त करने का आंदोलन
मेरे विचार से लीग का पहला काम यह होना चाहिए कि दलित वर्गों को गांवों के सामान्य कुओं से पानी भरने, ग्रामीण स्कूलों में उनके बच्चों को पढ़ाने, सार्वजनिक यातायात के साधनों का उपयोग करने, जैसे नागरिक