146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के इस कार्यक्रम को प्रभावकारी समझूंगा और मुझे यह कहने में जरा सी भी हिचक न होगी कि लीग दूसरी समस्याओं की अपेक्षा उन्हें प्राथमिकता देती है। यह सच है कि इस कार्यक्रम से सामाजिक उथल-पुथल और खून-खराबा भी हो सकता है। परन्तु इससे बचा नहीं जा सकता। मैं, न्यूनतम विरोध करने की वैकल्पिक नीति को भी जानता हूं। मुझे विश्वास है कि यह अस्पृश्यता को जड़ से समाप्त करने के मामले में प्रभावी नहीं होगी। अधिकतर नासमझ सवर्ण हिंदुओं में, जो प्राचीनकाल से अविवेकपूर्ण विचार चले आ रहे हैं, उनके कारण वे उन दलित वर्गों के उत्थान का कार्य नहीं कर सकते। सबसे पहली बात है सवर्ण हिंदू मानव स्वभाव के अनुकूल दलित वर्गों के साथ परंपरागत अस्पृश्यता को मानकर चलता है। प्रायः लोग अपने पुराने रीतिरिवाजों के अनुसार व्यवहार करना नहीं छोड़ते, क्योंकि कुछ लोग उन रीतियों को छोड़ने के विरुद्ध प्रचार करते हैं। परंतु पुराने रीति-रिवाजों के अनुसार बर्ताव करने को धार्मिक स्वीकृति मिली हुई है। यदि उसे गलत करार नहीं दिया जाता अथवा उसे नहीं रोका जाता, तो लोगों के मस्तिष्क पर कोई अच्छा प्रभाव डाले बिना सब किए-किराए पर पानी फिर जाता है। उन आपदाओं से दलित वर्गों को तभी मुक्ति मिल सकती है, जब सवर्ण हिंदुओं को समझाया जाएगा और उन्हें यह अनुभव करने के लिए विवश किया जाएगा कि वे अपने पुराने तौर-तरीके बदलें। उन सवर्ण हिंदुओं में पुराने समय से प्रचलित रीति-रिवाजों की जो प्रथा है, उसके विरुद्ध आपको सीधी कार्यवाही करके आंदोलन चलाना है। उस आंदोलन के बाद उन्हें सोचना होगा और वे अगर सोचेंगे तो इससे उनमें परिवर्तन आएगा। इस शांत परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य यही है कि यह बौद्धिकता के दबाव में नहीं होगा। उसके बाद आंदोलन में आगे नहीं बढ़ेगा। महाद में चावदार, तालाब, नासिक के काला राम मंदिर और बालाबार के गुरुवयूर मंदिर प्रवेश के संबंध में, जो सीधी कार्यवाही की गई उससे कुछ ही दिनों में जो परिणाम निकला, वह परिणाम उपदेशात्मक रीति से लाखों दिनों से नहीं निकल सकता था। इसलिए मैं जोरदार शब्दों में ऐसा आंदोलन छेड़ने का सुझाव देता हूं कि सीधी कार्यवाही कर अस्पृश्यता निवारण लीग दलित वर्ग के लोगों को नागरिक अधिकार दिला सकती है। मुझे इस आंदोलन की कठिनाइयों का भी अहसास है और अपने अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि शांति और व्यवस्था को कायम रखने वाले अधिकारी भी हमारे पक्ष में होंगे। इसी वजह से मैंने उस योजना से जान-बूझकर मंदिर प्रवेश की बात को निकाल दिया है और इसे केवल