5. राजनीतिक दान - Page 170

राजनीतिक दान

155

अग्रणी रही थी और जो सदैव कांग्रेस के साथ लड़ाई लड़ती रही है, काली सूची में डाल दी गई और महार विद्यार्थियों के साथ उस समय तक भेदभाव किया जाता था, जब तक कि वे यह न सिद्ध कर दें कि वे कांग्रेस के विरुद्ध विचारों वाली संस्था में भाग नहीं लेते।

अंतिम उदाहरण जो मैं प्रस्तुत कर रहा हूं, श्री ए.वी. ठक्कर से संबंधित है। वे हरिजन सेवक संघ के महामंत्री हैं। श्री ठककर बम्बई सरकार के पिछड़ी जाति बोर्ड के सदस्य भी हैं। इस बोर्ड की स्थापना 1929 में हुई थी। इसकी बैठकें समय-समय पर होती हैं और वह अस्पृश्यों और पिछड़ी जातियों से संबंधित विषयों पर सरकार को सलाह देता है।

बोर्ड की बैठक में श्री ठक्कर एक प्रस्ताव लाए थे, जिसमें सरकार से इस बात की सिफारिश की गई थी कि अस्पृश्य विद्यार्थियों को सरकार द्वारा दी जाने वाली छात्रवृत्ति में से, महार छात्रों को निकाल दिया जाए, क्योंकि महार जाति शिक्षा में काफी आगे बढ़ गई है। अतः उन्हें छात्रवृत्ति देना सरकारी धन का दुरुपयोग करना होगा। अतः उसे अन्य अस्पृश्य जातियों के लिए सुरक्षित रखा जाए। प्रस्ताव के तथ्यों का पता लगाने के लिए भेजा गया। जांच रिपोर्ट से ज्ञात हुआ कि प्रस्तुत के तथ्य गलत थे और यह भी ज्ञात हुआ कि महान आगे बढ़ जाने के बजाए शिक्षा के क्षेत्र में अन्य अस्पृश्य जातियों की अपेक्षा वास्तव में काफी पिछड़े हुए हैं। वह प्रस्ताव राजनीतिक कपट के सिवाए और कुछ नहीं था और वह भी उस व्यक्ति द्वारा, जो हरिजन सेवक संघ का महामंत्री था और कांग्रेस-विरोधी होने के कारण उन्हें सजा देना चाहता था।

इन सब बातों से क्या सिद्ध होता है? क्या इससे यह साबित नहीं होता कि हरिजन सेवक संघ केवल नाम के लिए धर्मार्थ संस्था है और उसका मुख्य लक्ष्य अस्पृश्यों को कांग्रेसी जाल में फंसाना, उन्हें हिंदुओं और कांग्रेस के पिट्ठू बनाना, उनके उन आंदोलनों को रोकना, जिनका लक्ष्य हो अपने आपको सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में हिंदुओं के प्रभुत्व से छुटकारा दिलाना। क्या इस बात में भी कोई आश्चर्य है कि अस्पृश्य हरिजन सेवक संघ को इस कारण घृणा की निगाह से देखते हैं कि संघ उन्हें पुचकार कर मारना चाहता है।