154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हां में हां मिलाने लगें। ऐसा भी हो सकता है कि अस्पृश्यों के लिए काम करने के साथ-साथ हरिजन सेवक संघ उन्हें कांग्रेस के सांचे में ढाल दे। अस्पृश्यों को जीवन संग्राम में लड़ने योग्य बनाने के साथ-साथ उन्हें अपना राजनीतिक क्षेत्र चुनने के लिए स्वतंत्र छोड़ देना स्पष्टतः एक तरह का दान होगा। परंतु हिंदू ऐसे दान का कब तक समर्थन करते? अधिक समय तक नहीं। हिंदुओं द्वारा अस्पृश्यों पर, जो अत्याचार किए जा रहे हैं, उसके प्रति उनमें पश्चाताप और आत्मग्लानि नहीं है। संघ जिस दान पर जीता है वह समाप्त हो जाएगा। यदि वह इससे बचना चाहता है, तो उसे चाहिए कि वह हिंदुओं को बताए कि अस्पृश्य धर्म और राजनीति को लेकर हिंदुओं के विरुद्ध नहीं हैं। इस विषय में मेरी विवेचना सही नहीं भी हो सकती है। परंतु इस वास्तविकता से इंकार नहीं किया जा सकता कि हरिजन सेवक संघ एक राजनीतिक संस्था है, जिसका प्रत्यक्ष लक्ष्य और उद्देश्य है - अस्पृश्यों को कांग्रेस में लाना।
मैं कुछ उदाहरण दे सकता हूं, जो मुझे महत्वपूर्ण लगते हैं। हरिजन सेवक संघ अपने कार्यकर्ताओं के सम्मेलन आयोजित करता है। सम्मेलन विभिन्न भाषाई अंचलों में संगठन के कार्य की प्रगति की समीक्षा और विचार तथा अनुभवों का आदान-प्रदान करने के लिए होते हैं। इसी प्रकार की एक सभा पूना में वर्ष 1939 में जून के पहले सप्ताह में हुई थी। मालूम हुआ कि उस सभा में एक ऐसे प्रस्ताव की योजना बनाई गई कि सरकार से कहा जाए कि पूना पैक्ट के अंतर्गत की गई मतदान व्यवस्था बदली जाए और विभाजक मतदान को एकीकृत मतदान में बदला जाए। मैं पहले ही बता चुका हूं कि पूना पैक्ट के समय हथियार डाल देने पर कांग्रेस ने विभाजक मतदान प्रथा पर कितना जोर डाला और अस्पृश्यों के लिए यह कितनी खतरनाक बात थी। पैक्ट को विफल करने में कांग्रेस असफल रही। संघ ने उसका झंडा थम लिया और यह भली-भांति जानते हुए कि अछूत उसका विरोध करते थे, एक गैर-राजनीतिक संस्था के लिए यह कितना आश्चर्यजनक प्रस्ताव था। यह तो वही बात हुई कि नशे में धुत्त शराबी ढोल पीटता फिरे कि उसने तो कभी छुई भी नहीं। हरिजन सेवक संघ पर अस्पृश्यों से प्रदर्शन कराने जैसे कार्यों पर रोक लगी हुई थी।
मैं यह कहना चाहता हूं कि हरिजन सेवक संघ की बम्बई शाखा ने अपने कांग्रेस विरोधी दृष्टिकोण के कारण शहर में रहने वाली कुछ अस्पृश्य जातियों को काली सूची में दर्ज करने की नीति अपनाई। जातियों को जिन काली सूची में दर्ज किया गया था उनके विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति बंद कर दी गई और अन्य शैक्षिक सहायता से उन्हें वंचित कर दिया गया। महार जाति जो अस्पृश्यों के राजनीतिक आंदोलन की