6. एक झूठा दावा - Page 175

160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इन्हीं संख्याओं को जानना पर्याप्त नहीं है। उन्हें दूसरी परिस्थितियों के प्रकाश में भी पढ़ा जाना चाहिए। पहली परिस्थिति है मताधिकार का आधार और दूसरी स्थिति है चुनावों में दो पार्टियों की सापेक्ष स्थिति। बिना इन बातों पर विचार किए चुनावों के परिणामों के महत्व को ठीक से समझना सम्भव नहीं होगा। जहां मत मतदान का प्रश्न है, कुल आबादी के अनुपात में वास्तव में मतदान बहुत कम हुआ। कुल आबादी के कितने भाग ने मतदान किया, यह निम्नलिखित तुलनात्मक आंकड़ों से स्पष्ट हो जाएगाः

तालिका - 9

प्रांत जनसंख्या (1931) निर्वाचन गण

मद्रास 47193602 6145450 बम्बई एवं सिंध 26398997 3249500 बंगाल 1087338 6695483 संयुक्त प्रांत 49614833 5335309 पंजाब 24018639 2686094 बिहार एवं उड़ीसा 4232983 2932454 मध्य प्रांत 17990937 1741364 असम 9247857 815341 पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत 4684364 246609

कुल 272566150 29847604

कुल जनसंख्या के केवल दसवें भाग को ही मतदान करने का अधिकार था। अधिक से अधिक मतदान करने वाली मध्यवर्ग की तथा प्रबुद्ध जनता थी जो पूरी तरह कांग्रेस के पक्ष में थी। जहां तक कांग्रेस तथा गैर-कांग्रेसी दलों के संबंधों की बात है, निम्नलिखित बातों पर मुख्यतया ध्यान देना आवश्यक है। कांग्रेस के पास धन, संगठन और अन्य युद्ध साधन थे। गैर-कांग्रेसी प्रत्याशियों के पास न तो धन था और न ही उनका कोई संगठन था। कांग्रेस प्रत्याशी उच्च वर्ग के थे। वे ब्रिटिश साम्राज्य के शत्रु थे और देश को स्वतंत्र कराना चाहते थे। कांग्रेसी प्रत्याशियों को जेल यात्रा से शहीदी का दर्जा मिला था। यह नियम बन गया था कि जो देश के लिए जेल जा चुका हो वही कांग्रेस प्रत्याशी हो सकता था। कांग्रेसी प्रेस ने गैर-कांग्रेसी उम्मीदवारों को टोरी बच्चा बताते हुए कहा कि उन्होंने न तो देश सेवा की है और न ही देश के लिए कोई बलिदान किया है। वे तो अंग्रेजी साम्राज्य के दलाल हैं, देश के शत्रु हैं और धंधेबाज