एक झूठा दावा
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हैं। पिद्दी का शोरबा हैं, जो देश के हितों का सौदा करते हैं, आदि। जैसा कि मैंने कहा, भारत में कांग्रेसी प्रेस के अतिरिक्त कोई और प्रेस है ही नहीं। दूसरी मुख्य बात एक और थी जो कांग्रेसी उम्मीदवारों के पक्ष में कही जाती थी और गैर-कांग्रेसी उम्मीदवारों के विरोध में। कांग्रेस ने सन् 1920 के चेम्सफोर्ड सुधारों का बहिष्कार किया था और कांग्रेस प्रत्याशियों को देश के शासन के संबंध में हुई किसी भूल-चूक का कोई जवाब नहीं देना था। दूसरी ओर, गैर-कांग्रेसी प्रत्याशी वे थे जिन्होंने सुधारों का समर्थन किया था। उन्हें कमीशन की भूल-चूक का जवाब देना था। वे लोग जो प्रशासन का उत्तरदायित्व अपने कंधे पर वहन करने का साहस रखते हैं उन्हें यह सब करना ही पड़ता है। गैर-कांग्रेसी प्रत्याशियों को गंद, बला, आदि कहा गया और कांग्रेसी प्रत्याशी देवदूत घोषित किए गए थे, जो भारी कुप्रथाओं को दूर करते हैं। ऐसी परिस्थिति में समझा जा सकता है कि कांग्रेस का पक्ष कितना भारी था, फिर भी आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस को चुनाव में मात खानी पड़ी। इन सभी साधनों तथा जनता में प्रशंसा और सहानुभूति के कारण कांग्रेस को चुनाव में सफलता मिलनी चाहिए थी। परंतु तब भी उसे 50 प्रतिशत सीटें अथवा मत नहीं प्राप्त हो सके।
क्या इसमें अब भी संदेह है कि जो कांग्रेस सभी वर्गों एवं जातियों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है, उसका दावा थोथा एवं झूठा है और तथ्यों पर आधारित नहीं है।
II
कांगेस अस्पृश्यों का प्रतिनिधित्व करती है, इस दावे का भी मूल्यांकन किया जाना चाहिए। इस दावे की जांच भी वर्ष 1937 में हुए चुनावों के नतीजों के संदर्भ में की जा सकती है। जिन-जिन सीटों पर कांग्रेस और अस्पृश्य प्रत्याशियों की टक्कर हुई, इस विषय में सही ढंग से समझना संभव न होगा कि अस्पृश्यों को प्रतिनिधित्व देने के लिए क्या विधि अपनाई गई थी। इसलिए मैं भारतीय चुनाव प्रणाली को पहले उदाहरण के तौर पर स्पष्ट कर देना आवश्यक समझता हूं। खासतौर से विदेशियों के लिए, किसी भी चुनाव व्यवस्था के चार मूल-तत्वों का विवेचन किया जाता है, जैसे कि (1) निर्वाचक, जिसे भारत में लोग निर्वाचन-क्षेत्र कहते हैं, (2) मतदान का अधिकार, (3) निर्वाचन के लिए प्रत्याशी के रूप में खड़े होने का अधिकार और (4) कौन प्रत्याशी सफल हो सकता है, इसे निश्चय करने के नियम।
- गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, 1935 द्वारा अनुमोदित निर्वाचन-क्षेत्र दो तरह के होते हैं µ