6. एक झूठा दावा - Page 183

168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

से 290737 अर्थात् 18 प्रतिशत वोट कांग्रेस के पक्ष में और 80 प्रतिशत वोट कांग्रेस के विरुद्ध पड़े थे। कांग्रेस अस्पृश्यों का प्रतिनिधित्व करती है, इसके लिए क्या इससे और भी कोई पक्का सबूत हो सकता है? संभव है कि कांग्रेसी मतों को मापदंड के रूप में स्वीकार न करें और प्राप्त की गई सीटों को ही अस्पृश्यों के प्रतिनिधित्व के दावे का आधार बताए। कोई भी समझदार व्यक्ति 151 में से 78 सीटों अथवा 5 सीटों के बहुमत को ऐसी विजय नहीं कहेगा जिसकी चर्चा की जाए। वास्तव में सीटों के आधार पर भी कांग्रेस का दावा करना निरर्थक है। निर्वाचन परिणामों का और विवेचन करने से स्पष्ट हो जाता है कि जो सीटें अस्पृश्यों के लिए आरक्षित थीं, उनमें से बहुमत में सीटें प्राप्त करना कांग्रेस के लिए बहुत दूर की बात थी। उसने केवल अल्पसंख्या में सीटें प्राप्त कीं। यदि मान लिया जाए कि कांग्रेस की उपलब्धियां फर्जी न होकर वास्तविक हैं, तो भी कांग्रेस द्वारा जीती गई 78 सीटों में से निम्नलिखित कम कर दी जाएं -

  1. जो सीटें कांग्रेस ने हिंदू मतदाताओं की सहायता से जीतीं और यदि उनका

निर्णय अस्पृश्य मतदाताओं पर छोड़ दिया जाता तो वहां वे सीटें कांग्रेस के

हाथ से निकल जातीं।

  1. जो सीटें कांग्रेस ने जीतीं वे पूर्ण बहुमत के कारण नहीं वरन कांग्रेस

के मुकाबले में खड़े हुए गैर-कांग्रेसी अस्पृश्य उम्मीदवारों के बीच में वोट

बंट जाने के कारण जीतीं।

  1. वे सीटें जिन्हें अस्पृश्य जीत सकते थे बशर्ते कि सुरक्षित सीटों के

चुनावों में वे अस्पृश्यों को ही वोट देने और सामान्य अथवा गैर-दलितों के

उम्मीदवारों को वोट न देते।

मैं नहीं समझता कि कोई निष्पक्ष व्यक्ति ऐसी कसौटियों पर कैसे एतराज करेगा? उस उम्मीदवार को जिसे बहुमत अस्पृश्यों के मतों के कारण प्राप्त नहीं हुआ हो, यह कहने का कोई अधिकार नहीं है कि वह अस्पृश्यों का प्रतिनिधित्व करता है और कांग्रेस भी केवल इस कारण से कि वह अस्पृश्य कांग्रेस के टिकट पर खड़ा हुआ था, यह नहीं कह सकती कि वह इस उम्मीदवार के माध्यम से अस्पृश्यों का प्रतिनिधित्व करती है। वह अस्पृश्य उम्मीदवार जिसे केवल इसलिए बहुमत मिल गया कि उसके विरोध में कई उम्मीदवारों के बीच वोट बंट गए थे, और वह ही ऐसा उम्मीदवार था जो अस्पृश्य था और जो कांग्रेस के टिकट पर खड़ा हुआ था, अस्पृश्यों का वास्तविक प्रतिनिधि नहीं कहला सकता। वह उम्मीदवार भी अस्पृश्यों का प्रतिनिधि नहीं कहला सकता, जो किसी आरक्षित सीट के लिए भारी संख्या में लोगों के चुनाव में रुचि न रख्ने के बावजूद जीता हो। ऐसी अस्पृश्य सीटें भी कांग्रेस सूची से निकाल दी जाएं।