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एक झूठा दावा

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कहा जा सकता कि कांग्रेस और अस्पृश्यों के बीच में चुनाव संघर्ष का परिणाम कांग्रेस के इस दावे को ठोस बनाता है कि कांग्रेस ही अस्पृश्यों का प्रतिनिधित्व करती है। यदि कांग्रेस के अस्पृश्य उम्मीदवारों को 78 सीटें मिली थीं, तो गैर-कांग्रेसी अस्पृश्यों को भी 73 सीटें मिली थीं। यह एक कांटे का संघर्ष था।

अब हमें कांग्रेस के उस दावे का परीक्षण करना है, जिसमें कांग्रेस अपने पक्ष के अस्पृश्य उम्मीदवारों को मिले मतों का हवाला देती है। 1937 के चुनावों में कुल 1,586,456 वोट पड़े थे। निम्नलिखित तालिका में दिखाया गया है कि चुनाव में वोट कैसे बंटे। कितने वोट अस्पृश्य कांग्रेसी उम्मीदवारों के पक्ष में पड़े थे और कितने गैर-कांग्रेसी अस्पृश्यों के पक्ष मेंः

तालिका - 10

अस्पृश्य मतदाताओं द्वारा डाले गए मत

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79571
195464
624797
115354
158076
22187
69126
22437
8707
132180
321616
684443
134861
171047
30841
69126
27757
14585
oqQy 290737 1295719 1586456

यह सभी जानते हैं कि एक पार्टी द्वारा प्राप्त की गई सीटों की संख्या सदा पार्टी के पक्ष में डाले गए मतों की संख्या के अनुपात में नहीं हुआ करती। अक्सर अल्पसंख्या में प्राप्त मतों के आधार पर भी पार्टी बहुमत प्राप्त कर लेती है। यह बात मुख्यतः वहां खरी उतरती है, जहां एक सदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्र होता है, जैसा भारत में है। पार्टी के वास्तविक शक्ति का मापदंड पार्टी द्वारा प्राप्त मत होते हैं। इस बात पर विचार करने से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि कुल मतों की संख्या 1,586,456 में