अध्यायः 7
झूठा आरोप
क्या अस्पृश्य अंग्रेजों की कठपुतली हैं?
जैसा मैंने पहले कहा था, जब से श्री गांधी कांग्रेस के कर्ताधर्ता बने तब से उसका कायाकल्प हो गया। उसमें एक मोड़ ध्यान देने योग्य है, क्योंकि यही वह मोड़ है, जिस पर आकर कांग्रेस का भाव बढ़ा और लोगों का ध्यान कांग्रेस की ओर गया। श्री गांधी से पहले कांग्रेस की गतिविधियां केवल विभिन्न स्थानों पर वार्षिक बैठकें कर लेने और भारत में ब्रिटिश प्रशासन संबंधी प्रस्ताव पास करने तक ही सीमित थीं। 1919 में श्री गांधी द्वारा कांग्रेस की बागडोर संभाल लेने के बाद यह कांग्रेस जीवंत दल बन गई और उसने ऐसे कार्य किए, जिनके विषय में कभी किसी ने सोचा भी नहीं था। जिन कार्यों से कांग्रेस को जनसमर्थन मिला और इसने एक के बाद एक हथियार प्रयोग किए जैसे (1) असहयोग, (2) बहिष्कार, (3) सविनय अवज्ञा, और (4) अनशन। असहयोग का उद्देश्य था सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, न्यायालयों में सरकारी नौकरी से छुट्टठ्ठी कर उनकी अनदेखी कर सरकार को पंगु बना देना। बहिष्कार कांग्रेस का दूसरा हथियार था, जिसका उद्देश्य था कांग्रेस के आदेशों के अनुसार ही लोगों को सरकार को सहयोग देने से रोकना। इसकी दो धाराएं थीं, सामाजिक और आर्थिक। सामाजिक धारा वह थी जिसके द्वारा दोषी व्यक्ति के प्रति सामाजिक व्यवहार यहां तक कि नाइयों, धोबियों, कसाइयों, पंसारियों तथा व्यापारियों की सेवाएं तक बंद कर देना था। आर्थिक धारा यह थी, जिसके द्वारा माल के क्रय-विक्रय आदि सभी व्यापारिक संबंधों से नाता तोड़ लेना। उसका लक्ष्य था वे व्यापारी, जो विदेशी माल बेचते थे। उनका सविनय अवज्ञा का सीधा हमला ब्रिटिश सरकार पर था। न्यायिक हिरासत में, जेल भरो और सरकार को नीचा दिखाओ के लिए जान बूझकर कानून का उल्लंघन करना उसका हथियार है। ऐसा सामूहिक सविनय अवज्ञा अथवा व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा द्वारा किया जाता है। दुर्भाग्यवश कांग्रेस द्वारा सामूहिक अनशन नहीं किया गया। अनशन केवल व्यक्तिगत क्षेत्र तक ही सीमित रखा गया। दुर्भाग्यवश