9. विदेशियों से आग्रह - Page 231

216 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

घंटों प्रतीक्षा किया करते थे। वे पैर धोकर यह पानी अपने माता-पिता को दे देते थे, जो भोजन के लिए उसकी प्रतीक्षा करते थे। ब्रिटिश शासन के कारण और कानून के समक्ष समानता के कारण ब्राह्मणों के विशेषाधिकार और दंडित न किए जा सकने की सुविधाएं छिन गई। फिर भी निम्न वर्ग उसे पवित्र मानते हैं। आज भी वे उसे फ्स्वामीय् कह कर पुकारते हैं, जिसका अर्थ है भगवान।

दूसरे परीक्षण से भी ऐसा ही निष्कर्ष निकलता है, उदाहरण के लिए मद्रास प्रेसीडेंसी को लीजिए। अगले पृष्ठ पर तालिका संख्या 17 का अवलोकन कर विचार करें। इससे स्पष्ट है कि वर्ष 1943 में राजपत्रित पद ब्राह्मणों तथा अन्य समुदायों में किस प्रकार बांटे गए थे।

इसी प्रकार के आंकड़े इस कथन की पुष्टि में अन्य प्रांतों से भी प्रमाण के तौर पर दिए जा सकते हैं। परंतु उसके लिए परिश्रम करने की कोई आवश्यकता नहीं। ब्राह्मण अपने आपको शासक वर्ग का सदस्य होने का दावा करता है या नहीं, वास्तविकता यह है कि प्रशासन पर उन्हीं का नियंत्रण है और शासित वर्ग उनके ब्राह्मणपन को स्वीकारता है। यह प्रमाण काफी है।

इतिहास साक्षी है कि ब्राह्मण सदैव उन्हीं अन्य वर्गों को अपने से सम्बद्ध करते थे, जिन्हें वे शासक वर्ग के समान स्तर देने को तैयार होते थे। वह इस शर्त पर कि वे शासक वर्ग में उनके अधीन रहकर उन्हें सहयोग देंगे। प्राचीनकाल तथा मध्यकाल में ब्राह्मणों ने क्षत्रियों अथवा सैनिक वर्ग से ऐसा संबंध जोड़ा था और दोनों ने जनता पर शासन किया। वास्तव में उन्होंने जनता को कुचल डाला था। ब्राह्मणों ने अपनी कलम से और क्षत्रिय ने तलवार से अत्याचार और शोषण किया। इस समय ब्राह्मण ने वणिक वर्ग को भी, जिसे बनिया कहते हैं अपने साथ जोड़ लिया। क्षत्रियों से नाता तोड़कर बनियों से संबंध जोड़ना उनके लिए स्वाभाविक है। आज के व्यापारिक युग में धन महत्वपूर्ण शस्त्र है। इस प्रकार नाता जोड़ने के परिवर्तन का यही मुख्य कारण है। दूसरा कारण यह है कि राजनीतिक मशीनरी को गतिमान रखने के लिए धन की आवश्यकता है। धन केवल बनियों से मिल सकता है। यह केवल बनिया वर्ग ही है, जो श्री गांधी के बनिया होने के कारण, कांग्रेस को धन देता है। उस बनिया वर्ग को यह भी मालूम है कि राजनीतिक क्षेत्र में पैसा लगाने से उन्हें काफी लाभ मिलेगा।

जिन लोगों को इसमें कोई संदेह हो, वे उसे पढ़े, जो 6 जून, 1942 को श्री लुई फिशर से श्री गांधी की वार्ता हुई थी। ख्1, फिशर ने लिखाः

मैंने कांग्रेस पार्टी के विषय में श्री गांधी से कई प्रश्न किए। मैंने श्री गांधी

से पूछा फ्उच्च पदाधिकारी अंग्रेजों ने मुझे बतलाया था कि कांग्रेस धनी वर्ग,

  1. ए वीक विद गांधी (1943), पृ. 41