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विदेशियों से आग्रह

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मालाबार में जहां पर सम्बंधम विवाह प्रथा प्रचलित थी, वहां शासित वर्ग, जैसे नायर अपनी औरतों को ब्राह्मणों द्वारा रखैल बनाए जाने में अपनी इज्जत समझते थे। ख्1, यहां तक कि राजा भी अपनी रानियों का सुहाग रात को कौमार्य भंग कराने के लिए ब्राह्मण को निमंत्रण देते थे। एक समय ऐसा था जब शासित वर्ग का कोई मनुष्य उस पानी को पिए बिना भोजन नहीं कर सकता था, जिस पानी से ब्राह्मण के पैर का अंगूठा धोया गया हो। सर पी.सी. रे ने अपने बचपन की लिखी है कि कलकत्ता की सड़कों पर प्रातःकाल शासित वर्ग के बच्चे पात्रों में पानी लिए ब्राह्मण के पैर धोने के लिए

  1. यात्रा श्री लुडोविको डि वरथेमा, जो 16वीं शताब्दी के मध्य में भारत आया था, मालाबार के विषय में

लिखता है फ्यह जानकर अच्छा लगा कि ये ब्राह्मण कैसे हैं। यह आपको ज्ञात होना चाहिए कि हमारे

पुजारियों की तरह ब्राह्मण भी धर्म के मुखिया हैं और जब कोई राजा अपनी पत्नी ब्याह कर लाता है,

तो वह पहले ब्राह्मणों में से एक सुयोग्य और प्रतिष्ठित ब्राह्मण को अपनी नव-विवाहिता पत्नी के साथ

पहली रात में सोने के लिए चुनता है, इसलिए कि ब्राह्मण उस विवाहिता रानी का कौमार्य हरण करे।

यह न समझें कि ब्राह्मण ऐसा करने के लिए इच्छापूर्वक जाते हैं। इसके लिए राजा उस ब्राह्मण को

400-500 स्वर्ण मुद्राएं देता है। कालीकट में राजाओं के अतिरिक्त और किसी में भी ऐसी प्रथा नहीं

है। (वोयेजिस ऑ वरेथेमा हक्युयात सोसायटी खंड 1, पृष्ठ 141)

दूसरे यात्री हमें बताते हैं कि यह प्रथा काफी व्यापक थी। फ्हैमिलटन अपनी ‘अकान्ट ऑफ दी ईस्ट

इंडीस’ में कहते हैंः फ्जब राजा नव-विवाहिता पत्नी लाता है, तो वह अपनी पत्नी के साथ तब तक

सहवास नहीं कर सकता, जब तक कि नम्बूदरी अथवा धर्म-प्रमुख ब्राह्मण उसके साथ सहवास न

कर ले और यदि वह ब्राह्मण चाहे तो उसके साथ तीन रातों तक सहवास कर सकता है, क्योंकि उस

विवाहिता पत्नी के वैवाहिक संस्कार का पहला प्रसाद इस पवित्र देवता (ब्राह्मण) को भेंट किया जाना

चाहिए, जिसकी वह पूजा करती है और कुछ सामंत भी ऐसे होते हैं जो पादरी को यह प्रसाद चखाते

हैं, परंतु जनसाधारण को यह विशेष अधिकार प्राप्त नहीं है, बल्कि पुरोहित के बजाए स्वयं यह प्रसाद

चखते हैं।

(खंड 1, पृ. 308)

बुचानन ने अपने यात्रा वृत्त में लिखा है कि तामरी परिवार की पत्नियों को सामान्यतया नम्बूदरी ब्राह्मणों

द्वारा गर्भ धारण कराया जाता था। यदि वे चाहें, तो नायर लोगों से भी करा सकती हैं, परंतु नम्बूदरी

ब्राह्मण से गर्भित होना पवित्र कार्य समझती हैं।

(पिपकरटने वायज खंड टप्प्प्, पृ. 734)

मि. सी.ए. इन्नेस आई.सी.एस. जो मालाबार और अंजेंगो के गजेटियर के संपादक थे, जो मद्रास सरकार

के प्राधिकार के अन्तर्गत निकलता है ने लिखा है -

मरुक्काटायम प्रथा को पालन करने की प्रथा अधिकारी वर्गों में प्रचलित है, जो मलयाली विवाह पद्धति

में प्रचलित अजीबोगरीब प्रथा है। इस प्रथा का सार यह है कि लड़की को उसके गले में रजस्वला

होने की आयु से पहले सोने अथवा अन्य धातु की बनी हुई ताली (लॉकेट) बांध दी जाती थी। ताली

उसकी अथवा उससे ऊंची जाति का व्यक्ति बांधता था। वह उससे सम्बन्ध स्थापित कर सकती थी।

सामान्यतया यही होता था कि ताली बांधने वाला उसका दूल्हा बनता था और वही उससे सहवास करने

का अधिकारी था और यह कृत्य भूदेव करते थे। इससे निचले स्तर के लोगों का ऐसा विवाह सम्पादन

क्षत्रिय अथवा शासक वर्ग के लोग करते थे तथा अपने से निम्न जाति की स्त्री का प्रथम फल प्राप्त

करते थे।

(खंड 1, पृ. 101)