9. विदेशियों से आग्रह - Page 247

232 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

300-300 प्रतिनिधि पहुंचे। प्रश्न यह उठता है कि 1200 सदस्य कैसे बैठते, बहस करते और मतदान करते। जनसामान्य के तीनों दलों की यूनियनों को एक चैम्बर में बैठने के लिए और एक व्यक्ति एक मत के आधार पर मतदान करने के लिए जोर दिया। पादरियों तथा सामंतों ने इस स्थिति को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि ऐसा करने का अर्थ होता अपनी अमूल्य परंपराओं और सुविधाओं का परित्याग करना। तब भी उनमें से अधिकांश ने जनसामान्य की मांग स्वीकार कर ली और फ्रांस को स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व पर आधारित संविधान दिया।

जापान के शासक वर्ग ने वर्ष 1855 से 1870 के दौरान जब जापानी सामंतशाही को त्याग कर वर्तमान शासन पद्धति अपनाई तब वहां का शासक वर्ग फ्रांस के शासक वर्ग की अपेक्षा अधिक देशभक्त था। जैसा कि जापान के इतिहास का विद्यार्थी ख्1, जानता है, जापानी समाज में चार वर्ग थेः 1. दमियों, 2. समुराई, 3. हेमिन अथवा जन सामान्य और 4. ईटा अथवा बहिष्कृत। इन जातियों के सीढ़ी-दर-सीढ़ी ऊंचे-नीचे वर्ग थे। सबसे नीचे ईटा थे, जो हजारों की संख्या में थे। उनमें से ऊपर हेमिन थे जो ढाई तीन करोड़ थे। हेमिन से ऊपर समुराई थे, जिनकी संख्या 20 लाख थी, जिनके हाथों में हेमिनों का जीवन-मरण बंद था। सबसे ऊपर दमिया अथवा बड़ी जागीर वाले सामंत थे, जिनका नीचे के तीनों वर्गों पर पूर्ण शासन था। उनकी संख्या 300 थी। दमियो और समुराई लोगों ने समझ लिया कि सभी को समानता और समान नागरिकता देना और सामंतवाद को त्याग देना संभव है। तदनुसार दमियो लोग जो राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत थे और राष्ट्रीय एकता में कोई बाधा नहीं उत्पन्न करना चाहते थे, अपनी सुख-सुविधाओं का परित्याग करने के लि आगे आए और सर्वसाधारण में शामिल हो गए। 5 मार्च, 1869 को उन्होंने सम्राट को जो याचिका दी थी वह इस प्रकार थी -

फ्हम जिस भूमि पर रहते हैं वह सम्राट की है। जो अनाज हम लोग खाते

हैं, वह सम्राट के आदमियों द्वारा पैदा किया जाता है। तो हम किसी जायदाद

को अपनी कैसे कह सकते हैं? अब हम स्वेच्छा से अपनी संपत्ति सादर

समर्पित करते हैं और हमारे समुराई तथा जन सामान्य भी आपसे अनुरोध

करते हैं कि सम्राट उन लोगों को संपत्ति देने की कार्रवाई कराएं, जिन्हें

वास्तव में यह मिलनी चाहिए और उन्हें दंडित करें, जो उस संपत्ति के

रखने के अधिकारी नहीं हैं। सम्राट विभिन्न वंशों व जातियों के भू-भाग

में आवश्यक परिवर्तन करने तथा उसे नया रूप देने के लिए आवश्यक

  1. देखिए रोमेन्स ऑफ जापान, लेखक जेम्स ए.बी. सेरर।