परिशिष्ट
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केंद्र तथा प्रांतीय सरकारों में मंत्रिमंडल का गठन करते समय मुस्लिम सदस्यों तथा अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को परम्परा के अनुरूप यथोचित संख्या में मंत्रिमंडल में स्थान दिए जाएंगे।
केंद्र तथा प्रांतीय सरकारों के अधीन अधिकारसंपन्न स्थाई विभाग होंगे, जो अल्प-संख्यकों के हितों की रक्षा करेंगे तथा उनकी उन्नति एवं कल्याण का ध्यान रखेंगे।
उन सभी समुदायों को जिन्हें विधानमंडलों में नामांकन अथवा चुनाव के माध्यम से प्रतिनिधित्व प्राप्त है, सभी विधानमंडलों में पृथक निर्वाचन व्यवस्था के माध्यम से कम से कम उतने अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलेगा जो कि अनुसूची में दिया हुआ है। परंतु बहुसंख्यक को अल्पसंख्यक के स्तर पर लाने अथवा समसंख्या बना देने का अधिकार न होगा। परंतु शर्त यह है कि समुदाय से दस वर्ष बीत जाने के बाद मुसलमानों को पंजाब और बंगाल में और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय को अन्य प्रांतों में संयुक्त निर्वाचन प्रणाली स्वीकार करने की अथवा संयुक्त निर्वाचन में चुनाव द्वारा सीटों के आरक्षण प्राप्त करने की छूट रहेगी। इसी प्रकार दस वर्ष बीत जाने के बाद किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय को समुदाय की सम्मति पर केंद्रीय विधानमंडलों में चुनाव द्वारा सीटों के आरक्षण अथवा अनारक्षण के विषय में संयुक्त निर्वाचन प्रणाली स्वीकार करने की छूट रहेगी।
दलित वर्ग के पृथक निर्वाचन व्यवस्था को 20 वर्ष के अनुभव या तब तक, जब तक कि दलित वर्ग को वयस्क मताधिकार प्राप्त नहीं हो जाता, संयुक्त निर्वाचन में नहीं बदला जाएगा।
केंद्र तथा प्रत्येक प्रांत में लोक सेवा आयोग की स्थापना की जाएगी, जो सरकारी सेवाओं में केवल उन पदों को छोड़कर नियुक्ति करेगा, जो गवर्नर जनरल अथवा प्रांतीय गवर्नरों द्वारा नामांकन द्वारा भरे जाएंगे। सभी संप्रदायों को समुचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता और क्षमता ध्यान में रखी जाएगी। भर्ती के विषय में गवर्नर जनरल तथा प्रांतों के गवर्नर संबंधित लोक सेवा आयोग को आवश्यक निर्देश जारी करेंगे और समय-समय पर उनकी कार्य-प्रणाली की समीक्षा करेंगे।
यदि विधानमंडल में किसी समुदाय के दो तिहाई बहुमत से कोई ऐसा विधेयक पास कर दिया जाता है, जो शेष एक तिहाई प्रतिनिधियों के धार्मिक और सामाजिक हितों तथा उनके मौलिक अधिकारों के विरूद्ध है और उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो एक तिहाई सदस्यों को अधिकार होगा कि सदन द्वारा पारित विधेयक के एक माह के अंदर अपना एतराज लिखकर सदन के अध्यक्ष को दें, जिसे अध्यक्ष गवर्नर