318 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
परिशिष्ट 3
अल्पसंख्यक समझौता
सांप्रदायिक समस्या का हल करने के लिए मुसलमानों, दलित वर्गों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियन तथा यूरोपियन लोगों द्वारा सामूहिक रूप से प्रस्तुत समझौते के प्रावधान।
अल्पसंख्यक समुदायों के दावे
किसी भी मनुष्य को उसके जन्म, धर्म, जाति अथवा पंथ के भेद के कारण सार्वजनिक नौकरी, राजनीतिक अधिकार अथवा सरकार अथवा उसके नागरिक अधिकारों का उपयोग करने से और किसी प्रकार का व्यापार करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा।
संविधान में कानूनसम्मत संरक्षणों का समावेश किया जाएगा ताकि व्यवस्थापिका में समुदाय के विरूद्ध भेदभाव मूलक कानून न बनाया जा सके।
सभी समुदायों को गारंटी दी जाए कि शांति व्यवस्था की शर्त पर उन्हें पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता अर्थात् विश्वास, पूजा पद्धति, प्रचार करने, संगठन बनाने और शिक्षा प्राप्त करने की स्वतंत्रता होगी।
कोई भी व्यक्ति मात्र धर्म बदल देने अथवा विश्वास बदल देने के कारण नागरिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा, कोई सुविधाएं नहीं छीनी जाएंगी और दंड का भागी नहीं होगा।
उन्हें अपने खर्च से खैराती, धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं, स्कूल और अन्य शैक्षिक संस्थाएं स्थापित करने, उनका प्रबंध करने और उन पर नियंत्रण रखने का अधिकार होगा और वहां उन्हें अपने धर्म के अनुसार पूजा, अनुष्ठान आदि करने का अधिकार होगा।
अल्पसंख्यक समुदायों के धर्म, संस्कृति, वैयक्तिक कानूनों के संरक्षणों तथा शिक्षा, भाषा, खैराती संस्थाओं के विस्तार करने के लिए संविधान में यथोचित व्यवस्था की जाएगी और उनके हिस्से के अनुसार अन्यों की भांति उन्हें भी स्वायत्तशासी संस्थाओं द्वारा अनुदान के रूप में सहायता दी जाएगी।
कानून बना कर सभी नागरिकों को सभी प्रकार के नागरिक अधिकारों का उपयोग करने देने की गारंटी दी जाएगी और उनमें जान-बूझकर अवरोध डालना अपराध और कानून द्वारा दंडनीय माना जाएगा।